विकसित भारत के निर्माण में हमारी भूमिका
किसी भी राष्ट्र की नियति केवल उसकी सीमाओं या सरकारी नीतियों से तय नहीं होती, बल्कि उसके नागरिकों के सामूहिक
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Read Moreइतना टूटा हूं किशब्द भी साथ छोड़ देते हैंखामोशी बोलने लगती है रास्ते धुंधले से हैंकदम पहचान खो बैठे हैंपर
Read More“अंकों की इस दौड़ में, बचपन हुआ उदास।कंधों पर उम्मीद का, भारी पड़ा लिबास॥” भारत जैसे विकासशील देश में शिक्षा
Read Moreकेरल की राजनीति में इस बार सिर्फ सरकार नहीं बदली, कांग्रेस की अंदरूनी ताकत का नक्शा भी बदल गया। दस
Read Moreबचपन की कुछ स्मृतियाँ समय के साथ धुंधली नहीं पड़तीं, बल्कि और अधिक चमकने लगती हैं। वे याद आते ही
Read Moreमन में कई इच्छाऍंबुद-बुद होती रहती हैं,अगर उस ओर ध्यान दें तोहम अपना रास्ता भूल जाते हैं। चित्त की सहज
Read Moreमाँ, ममता की मूरत, माँ, धरा का धीरज, माँ, ममत्व का आँचल, माँ, करुणा सागर।। माँ, प्रभु प्रतिरूप, माँ-सा न
Read Moreमैं पानी हूंजीवन की कहानी हूंबादल का भाग्यसमुद्र की गहराई हूंगंगा की पवित्रताआंखों की तराई हूं । मैं पानी हूंबूंद
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