Category : पद्य साहित्य


  • हमीद के दोहे

    हमीद के दोहे

    बदअमनी का हर तरफ,लगा हुआ अम्बार। घोड़े  अपने   बेच  कर , सोता  चौकी दार। समझाये   कोई   मुझे , मँहगाई   का   राज़। आखिर क्यूँ मँहगा हुआ,चन्द दिनों में प्याज़। पाँव  बढ़ाते  ही  चलो, फूल मिलें या खार।...


  • यारा कोई बात नहीं

    यारा कोई बात नहीं

    माना तुम सही हो पर में गलत तो नहीं यारा कोई बात नहीं तुम्हारे महफिल से रुस्वा हूँ ये सही तो नहीं यारा कोई बात नहीं तुम से शिकायत नहीं करता पर ऐसा नहीं तुम से...


  • ग़ज़ल- *****ग़लती की*****

    ग़ज़ल- *****ग़लती की*****

    सबने जिसको छोड़ा उसको क्या अपनाकर ग़लती की. मैंने फ़र्ज़ निभाया तो क्या फ़र्ज़ निभाकर ग़लती की. सोचा था इक मौका दूँ वो अपनी भूल सुधार करे, लेकिन उसने फिर दोबारा मौका पाकर ग़लती की. उसके...

  • हुनर सीख लो

    हुनर सीख लो

    बांटने से विद्या बढ़ती है विद्या को बांटने का हुनर सीख लो, अन्न-धन को भी बांटने का हुनर सीख लो, मान-सम्मान को बांटने का हुनर सीख लो, प्रेम-प्यार को बांटने का हुनर सीख लो, दूसरों की...

  • प्याज के अच्छे दिन आए

    प्याज के अच्छे दिन आए

    प्याज बेचारी क्या करे, लोग करें बदनाम ‘महबूबा’-सा किया है गोडाउन में जाम गोडाउन में जाम, मचा कोहराम देखिए सपनों मे अब यही आ रही राम देखिए कह सुरेश कल थी सड़कों पर मारी-मारी तरकारी की...

  • गीत – छलिया आदमी

    गीत – छलिया आदमी

    आदमी ही आदमी को छल रहा है। आदमी से आदमी क्यों जल रहा है।। मान – मर्यादा हुई तार – तार इतनी! टूटी सरहद मान की लगातार कितनी?? आदमी को आदमी क्यों खल रहा है। आदमी...