Category : पद्य साहित्य

  • मन

    मन

    मन धूप है, मन छाया है, मन माया है, मन सरमाया है, मन मणि है, मन रत्न है, मन प्रयास है, मन प्रयत्न है, मन अटकाता है, मन भटकाता है, मन संतोषी बनाता है, मन लटकाता...

  • कविता – जीवन एक संघर्ष

    कविता – जीवन एक संघर्ष

    हालात बिगड़ेगा और कितना लगे रहो कि जीवन पथ है तुम्हे जीतना जीवन अगर संघर्ष है तो हौसले से ही मिलती उत्कर्ष है हार कर बैठना शोभा देता नहीं कि प्राण है तुम में उठो, परिस्थिति...

  • ये कैसा राम राज्य है

    ये कैसा राम राज्य है

    जो सारी धरती का स्वर्ग कहलाता है कश्मीर, दहशत की आग में आज जलता जा रहा है । उद्योगों से सज रहे है देखो अनेको नगर, गंगा का पावन जल अमृत से विष बनता जा रहा...

  • ऐसी दिवाली बनाओ तुम

    ऐसी दिवाली बनाओ तुम

    राग द्वेष लालच को हटाकर, अहंंकार को जड़ से मिटाकर, नई उमंग से उजियाला लाओ तुम। चहूँ दिशा में फैला है घनघोर अंधेरा, अब ले भी आओ नया सवेरा, जगमग मन के दीप जलाओ तुम ।...

  • प्यार

    प्यार

    प्यार का अर्थ बहुत व्यापक होता है ।जीवन का सार सिमटा हुआ है इस ढाई शब्द में । किसी के लिए प्यार सिर्फ काम है , तो किसी के लिए खेल ## किसी के लिए जाम...

  • जिंदगी

    जिंदगी

    भूल गया जो अपना पथ फिर मंजिल का है भान कहाँ । काँटों पर चलकर ही तो मिल पाता है अंजाम यहाँ । भूल गया जो दुख को अपने , सुख का है आभास कहाँ ,...

  • गीत

    गीत

    रश्मि-रथ की करके सवारी तुम आईं हिय-द्वार सुकुमारी श्वासों के आरोह-अवरोह से आहट होती प्रतिध्वनित तुम्हारी अथाह व्योम-से उर में जैसे दिव्य नूपुर खनक रहे हैं इस मादकता की धारा में सारे सुर-नर भटक रहे हैं...

  • जीवन के दोहे

    जीवन के दोहे

    जीवन मुरझाने लगा, ऐसी चली बयार ! स्वारथ मुस्काने लगा, हुआ मोथरा प्यार !! बिकता है अब प्यार नित, बनकर के सामान ! भावों की अब खुल गई, सुंदर बड़ी दुकान !! सब ही अपने में घिरे, त्याग दिये सब...

  • छंद पंचचामर

    छंद पंचचामर

    शिल्प विधान- ज र ज र ज ग, मापनी- 121 212 121 212 121 2 वाचिक मापनी- 12 12 12 12 12 12 12 12 “छंद पंचचामर” सुकोमली सुहागिनी प्रिया पुकारती रही। अनामिका विहारिणी हिया विचारती...

  • क्षणिकायें

    क्षणिकायें

    सब के सब देख रहे थे लगी हुई थी आग जलता हुआ रावण दर्शनार्थी अस्त ब्यस्त ट्रेन की डरावनी चिंघाड़ दौड़ती हुई उतावली रफ्तार धुँआँ उड़ा आँखों के सामने शायद ही कोई देख रहा था।।-1 जमीन...