कविता

राष्ट्रहित

राष्ट्र हित ————————- सर्वोपरि है राष्ट्र हमारा ,सर्वोपरि यह देश है | इसकी रक्षा के हित धारा,हमने यह नर वेश है | काट गुलामी की जंज़ीरे,लहराया है ध्वज अपना | नई डगर नूतन मंज़िल गढ़ , डंका जग में बजा दिया | संकट में हे वीरों तुमने ,धीरज कभी नहीं खोया | सिंचित धरती करी […]

कविता

4 व्यक्तित्व-प्रतिबिम्बित कविताएँ

डॉ. सदानंद पॉल की व्यक्तित्व प्रतिबिम्बित कविताएँ 1. सरदार बलदेव सिंह भारत के पहले रक्षामंत्री सरदार बलदेव सिंह के जन्मदिवस पर सादर नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि अभीष्ट सादरांजलि ! 2. सुरेश प्रभाकर प्रभु ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ पर एक ‘प्रभु’ का जन्म ! पेशे से CA, शिवसेना से आयात किए भाजपाई सुरेश प्रभाकर प्रभु के जन्मदिवस […]

क्षणिका

जनसंख्या नियंत्रण पर 5 हँसिकाएँ

डॉ. सदानंद पॉल की जनसंख्या नियंत्रण पर कविताएँ 1. जनसंख्या नियंत्रण काहे को भारत में ‘जनसंख्या दिवस’, यहाँ शादी करने की फनफनी रहती है और बच्चे पैदा करने की हनहनी ! 2. विश्व जनसंख्या दिवस जिनके एक से अधिक बच्चे हैं, उन्हें ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ यानी 11 जुलाई दिवस पर रत्ती भर भी बोलने का […]

कविता

आई लव यू की व्यापारी

  हम तो पागल प्रेमी हैं, बस, पल-पल गाते प्रेम के गाने। दुनिया पागल कहती, कह ले, सुन लेंगे, जग दे ले ताने।। प्रेम हैं हम, प्रेम पुजारी। प्रेम सवार है, प्रेम सवारी। प्रेम के बदले, ना कुछ पाना, प्रेमी हैं हम, ना व्यापारी। जहाँ रहो तुम, सुखी रहो बस, गा लेंगे हम, गीत पुराने। […]

क्षणिका

क्षणिकाएं

*रंग-रूप* युवती का ऐसा खिला रंग-रूप। जैसे सूरज ने केशर-दूध में घोल दिया हो मुट्ठी भर धूप। *भूख* एक था एक थी दोनों भूखे थे। था को मिला तन थी को मिला धन दोनों हुए खुश। *रहमत* कोरोना काल में वह बोला सब से घर से बाहर कभी रह मत। क्योंकि घर में है रहमत। […]

गीत/नवगीत

राजस्थानी पावस गीत

चार दिना रो जोबनो, कोई ना करज्यो देर। पल दो पल का जीवणा, फेर दिना रे फेर। बलम जी ! आई बरसण री रूत, देश म्हँ देश म्हँ। थे करज्यो ना मत देर पीव जी ! आओं जी आओं देश म्हँ, देश म्हँ। आकासा माँँय चमक्कै बिजली, बिजली ! घम घम घूघराँ सा घमक्कै घन […]

क्षणिका

6 अद्भुत क्षणिकाएँ

डॉ. सदानंद पॉल अद्भुत क्षणिकाएँ 1. चक्कूवाले मित्र उन मित्रो की समय रहते पहचान अवश्य कर लीजिए, जो अवसर मिलते ही आपकी पीठ पर चाकू घोपेंगे ही घोपेंगे ! 2. क्रिकेट में स्वांत: सुखाय वर्ल्डकप क्रिकेट से समय और धन दोनों की बर्बादी हुई, 2019 सेमीफाइनल में ‘टीम इंडिया’ की हार से ‘स्वान्त: सुखाय’ भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

टूट गई तंद्रा

टूट गई तंद्रा जो पग थाप से , सिद्ध होता है नाता मेरा आपसे | धड़कने बन्द होकर धड़कने लगीं, साजना आपके नाम के जाप से | बर्फ सा था जमा दिल पिघलने लगा, आपके प्यार के गीतों के ताप से | डर रही हूँ किसी को भनक न लगे, इस गज़ल की मेरी यूँ […]

कविता

एक बूंद

जब किसी मेघ से पानी की एक बूंद गिरती है कई प्रश्न होते है आशंकाएं होती हैं उसके मन में क्या वह किसी मरुस्थल में गिर कर सूख जायेगी किसी अग्नि की ज्वाला में गिरकर भस्म हो जाएगी यां किसी काटे पे गिरकर उसका बदन छलनी छलनी हो जाएगा परंतु जब वो गिरती है समुंदर […]

कविता

आखिर कब तक?

झूठे प्रेम प्रसंग में तुम,डटे रहे हो क्यों?राम-सी छवि तुम,खोकर बैठे हो क्यों?झेलकर शत्रुओं के तुम,वार अभी तक चुप बैठे हो क्यों?विषहीन नाग बनकर,सपेरों की बीन पर नाच रहे हो क्यों?यूं ही मौन रहकर तुम,लोगों के सम्मुख मुखदर्शक बन बैठे हो क्यों? –दिनेश प्रजापत