Category : पद्य साहित्य

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हर राम का जटिल जीवन पथ होगा जब पिता भार्या भक्त दशरथ होगा करके ज़ुल्म करता है वो इबादत कहो फिर कैसे पूर्ण मनोरथ होगा नींद आयेगी तुझे भी सुकून भरी जब तू भी पसीने से...


  • कविता – बसन्त

    कविता – बसन्त

    मै बंसत की बेला हूं, पतझड़ सा कठोर बहती पवन हूं पलको पर बिखरा सपनो वाला मन हूं, दो आंसू वाले पीली सरसो का खेत हूं हरे भरे उपवन में जलता रेत हूं, गरीब कहानी हूं...

  • कविता – एक जहर

    कविता – एक जहर

    एक बात पुरानी है एक घटिया सोच पुरानी है, दिल तो रोया कब का था आंखों में फिर आज मेरे पानी है, समझ न पाया मैं आज तक जाने कैसे रीति-रिवाज के नाम पर यह मनमानी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    आग फैले तू ऐसी कार न कर तेज बारूद ही की धार न कर। घुस जा घुसना है अगर, सीने में शूल बन पीठ पे तू वार न कर। ठेस छोटी ही मुझको काफी है मान...


  • नारी

    नारी

    नारी युग युग से मैं शोषित जननी होकर भी, युग युग से मैं व्यथित पूजनीय होकर भी। मैं पूजी जाती हूं देवी के रूप में, शक्तिदायिनी के रूप में, कल्याणकारिणी के रूप में, देकर इतना सम्मान...

  • तुम से वादा

    तुम से वादा

    मेरा ये इरादा है करना तुम से कुछ वादा है कभी ना छोड़ूगा तुम्हारा साथ चाहे कैसे भी हो हालात रखूँगा तुम्हारा मान कभी नहीं होने दूंगा अपमान बन कर तुम्हारा साया चलूँगा तुम्हारे साथ बिना...

  • ‘प्रॉमिस डे’

    ‘प्रॉमिस डे’

    देश-विदेश में हम सब मना रहे हैं ‘वेलेंटाइन वीक’ इस ‘वेलेंटाइन वीक’ में नहीं होगी महज पुरानी लीक कुछ नया करने का सोचेंगे और वादों को पूरा करने के संकल्प के साथ आज प्रॉमिस डे’ मनाएंगे....

  • मासूमियत

    मासूमियत

    न जाने क्या था उन आंखों में समझ नही पाई अभी इंसानो की भाषा समझ रही थी वो हैवानियत की भाषा पढ़ नही पाई कहना चाहती तो थी मगर कुछ कह नही पाई नासमझी के आंसुओं...