कविता

बोया पेड़ बबूल का

यह कैसी विडम्बना है कि हम बड़े मुगालते में रहते हैं, बोते पेड़ बबूल का, आम की आस रखते हैं। भ्रम मत पालिए सूदूर ऐसे तो नहीं होते हैं, कलयुग के इस जमाने में रामराज्य की परिकल्पना बेकार की बातें हैं। औरों को बेवकूफ समझने से बेहतर है खुद के बारे में पहले सोच लीजिए, […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

भले ही सुंदर वस्त्र तुम्हारे

गोल गोल गोलाइयाँ सुंदर, गहराइयों में समंदर हो। भले ही सुंदर वस्त्र तुम्हारे, तुम उनसे भी सुंदर हो।। फोटाे बहुत देखे हैं हमने। वार तुम्हारे सहे हैं हमने। चाह कर भी चाह न सकते, विश्वासघात देखें हैं हमने। बाहर से ना दिखलाओ केवल, दिखलाओ कैसी अंदर हो? भले ही सुंदर वस्त्र तुम्हारे, तुम उनसे भी […]

कविता

मैं विश्वनाथ का नंदी हूँ

मैं विश्वनाथ का नंदी हूँ, दे दो मेरा अधिकार मुझे। वापी में हैं मेरे बाबा, कर दो सम्मुख-साकार मुझे।। अब तो जागो हे सनातनी, डम- डमडम डमरू बोल रहा। न्यायालय आकर वापी में, इतिहास पुराने खोल रहा।। अब बहुत छुप चुके हे बाबा, करने दो जय-जयकार मुझे। एक विदेशी खानदान ने, मंदिर को नापाक किया […]

कविता

लक्ष्य

तम भरी रातों में जब कुछ न दिखाई दे । हृदय में एक ज्योति जलाओ करके ईश्वर पर विश्वास आगे बढ़ जाओ । अंतरतम में उजियाला होगा लक्ष्य सधेगा, मंजिल मिलेगी । विघ्न सारे मिटेंगे बुझी हुईं बातीं दीप बन जल उठेंगी । अधूरा यज्ञ होगा पूर्ण आहुतियां होंगी सार्थक । — मुकेश कुमार ऋषि […]

कविता

किताबें

  किताबें क्या हैं एक रोशनी हैं जो उजियाला कर देती हैं आदमी में किताबें लिखी जाती हैं संवेदनाओं पर चित्रण करती हैं जो दिखता समाज में किताबों के अक्षर स्याह जरूर हैं पर भर देते लोगों के जीवन में एक रोशनाई और एक रोशन हुआ आदमी काम करता है लैंप पोस्ट का

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

भारत की पहचान बनाती है साडी। नारी को धनवान बनाती है साडी। राधा कृष्ण स्वरूप सुशोभित मन्दिर में, प्रिय दर्शन भगवान बनाती है साडी। कृष्ण करें सुरक्षा जब भी द्रौपदी की, जीवन को कुर्बान बनाती है साडी। अहल्या का जीवन भी अज़ब कहानी है, चरित्र का निर्माण बनाती है साडी। दैहिकता का रूप बिके जब […]

कविता

धूप छांव

जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार आनी जानी हैं ये माया तुम हो या हो हम कभी कभी हंसी के फुहारे कभी बहे गुम के आंसू सुख में जो न बहके दुःख में टूटे न कोई तो जीवन  बने सफल टूट न जाएं […]

कविता

कविता – बुजुर्ग हमारी थिंक टैंक और शान है

बुजुर्ग हमारी थिंक टैंक और शान है परिवार का बड़प्पन और महान है अनुभवों और तजुर्बा की खान है जो बुजुर्ग दिव्यांगों की सेवा करें वह महान है दिव्यांगजन और राष्ट्रीय वायोश्री योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों को सहायक सहायता उपकरण वितरण सामाजिक अधिकारिता शिविरमें हुआ है दिव्यांगजन और बुजुर्ग सशक्तिकरण हो रहा है बुजुर्गों […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

द्रव इन आंखों से निकलता जा रहा है ये सूरज फिर यूं ही ढलता जा रहा है कोई है,जो लाल आंखों का सबब पूछे कुछ जहर सा सीने में जमता जा रहा है सब कुछ बांधने की कोशिश करता था एक एक कर सब  बिखरता जा रहा है गमों को छुपा कर मुस्कुराने का हुनर […]

कविता

रहस्य

‌चलते जा रहे हैं, बिना रुके, बिना समय गंवाए कहां जाना है जिसे पता है, जरा हमें बताए ।। क्यों आए थे धरा पर , कुछ तो उद्देश्य होगा क्या हासिल कर पाए जिसे पता है, जरा फर्माए ।। संग्रह करते जा रहे धन दौलत, ऐश्वर्य खजाना कौन साथ ले जा पाया जिसे पता है, […]