पद्य साहित्य

कुण्डली/छंद

दसानन

गली-गली में दसानन, एक अकेले रामहर दिल में रावण छुपे,निकलें सुबहोशामनिकलें सुबहोशाम,दुखी हैं भारत माताचक्र सुदर्शन धार, हमारे भाग्यविधाताकह सुरेश

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