कौन करे रहम
जो अटल है, अजर-अमर है,उसकी पीठ में घोंप रहे हो खंजर।अपनी निर्दयता के मद में चूर,कर रहे हो वनों को
Read Moreजो अटल है, अजर-अमर है,उसकी पीठ में घोंप रहे हो खंजर।अपनी निर्दयता के मद में चूर,कर रहे हो वनों को
Read Moreसबके मन में दर्द है, सबकी अपनी पीर।हँसते चेहरे ढाँपते, भीतर की तस्वीर॥ धूप मिली तो क्या हुआ, छाया भी
Read Moreआज रात प्रभु श्रीराम जी अभी अपने शयनकक्ष में पहुँचे ही थे कि पीछे से यमराज भी पहुँच गए, उन्हें
Read Moreमानवीय संवेदनाएँ शून्य हो गई हैं,कुछ लोग सबकी ज़िंदगी से खेल रहे हैं।क्या पैसा इतना ज़रूरी हो गया है,कि इंसानियत
Read Moreये हम कहां जा रहे है? संवेदनाहीन, भावशून्य, पिशाच वृत्ति से लिपट, मानव जीवन की अस्थियां ले, संस्कारों की धज्जियां
Read Moreमार्क, सच मानो, मैं तुमसे ज़रा भी इत्तेफाक नहीं रखता,सांख्यिकी ज्ञान, सफेद झूठ के परे, दर्ज हो नहीं सकता॥ जन्म
Read Moreकम में खुश रहिए, खुशी कम नहीं होगी,मन की यह दौलत कभी कम नहीं होगी।महलों की चमक से जीवन नहीं
Read Moreढलती शाम का सफ़रसांझ ढली है, सूरज लाल,पेड़ों के पीछे छुपा गुलाल।कच्ची सड़क पर उड़ती धूल,घर लौट रहे हैं सब
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