पद्य साहित्य

कुण्डली/छंद

दसानन

गली-गली में दसानन, एक अकेले रामहर दिल में रावण छुपे,निकलें सुबहोशामनिकलें सुबहोशाम,दुखी हैं भारत माताचक्र सुदर्शन धार, हमारे भाग्यविधाताकह सुरेश

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भजन/भावगीत

नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की महागाथा : शक्ति, साधना और सृष्टि की दिव्य गाथा

पर्वतराज के आँगन में जब दिव्य प्रभा मुस्काई,सती ने गिरिराज-सुता बन पुनः धरा पर छवि पाई।वृषभवाहिनी, त्रिशूलधारिणी, कमल सुशोभित हाथ,माँ

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