पद्य साहित्य

कविता

ज़ख्म मेरा है, तुम्हारा क्या है

नशीली नज़र उसकी मेरी जानिब,मैं मुस्कुराया था,एक हादसा था हुआ, लोगों इसमें तुम्हारा क्या है।उसको है मुहब्बत,मुझसे, मैं भी उससे

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