गीत
एक क्रान्ति का सहारा बन गए कबीर जी।शांत शुभमन का किनारा बन गए कबीर जी। अंधविश्वासों एंव पाखण्डों की निंदा
Read Moreनन्हे-नन्हे पाँव हैं, सपनों की उड़ान।बचपन की किलकारियाँ, घर की हैं पहचान॥ साइकिल, गुड़िया, खिलौने, मन में भरे उमंग।हँसते-गाते बालपन,
Read Moreपुरानी राहें,धूप में सोई हुई,मन टटोलता। सूखे पत्तों में,बीते वर्षों की गूँज,धीरे बहती। खिड़की के पास,चाँदनी चुपके उतरे,स्मृतियाँ जागें। बरगद
Read Moreहम कच्चे से हैं घड़े, पिता कुशल कुम्हार।ठोक-पीटकर प्रेम से, देते सही आकार॥ सिर पर छाया बन खड़े, बने नीम
Read Moreहाँ, लिखने की कोशिश कुछ विक्षिप्त,और मानने लगते स्वयं को दैदीप्य।उगलते भीतर का तीखा ज़हर,जिस पर अमल ला सकता कहर।
Read Moreतुम्ही हमारे माता-पिता और जीवन रक्षक हो,तुम्ही हमारे बंधु सखा और पापों के भक्षक हो,क्षमादान दिया नया जीवन दे नाथ
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