पद्य साहित्य

कविता

मेले की रौनक

एक मेले की रौनकबड़ी-बड़ी दुकानों सेनहीं सजती हैमेले मेंगुब्बारेवाला न होखिलौनेवाला न आयेचाटवाला न आयेचूड़ीवाला न आयेझूले न आयेजलेबीवाला न

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गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

छोड़िए अब तिलमिलाहटसाथ   रखिए   मुस्कुराहट आ  करो  फिर   से चरागांता  यहाँ  हो   जगमगाहट उसके  छूने   से  मुझे क्यूँहो  रही   है    सनसनाहट बद ज़बानी 

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