धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

स्वाध्याय से जीवन की उन्नति सहित अनेक रहस्यों का ज्ञान होता है

ओ३म् मनुष्य जीवन में सबसे अधिक महत्व ज्ञान का बताया जाता है और यह बात है भी सत्य। हम चेतन आत्मा हैं। हमारा शरीर जड़ है। जड़ वस्तु में ज्ञान प्राप्ति व उसकी वृद्धि की सम्भावना नहीं होती। जड़ वा निर्जीव वस्तुयें सभी ज्ञानशून्य होती हैं। इनको किसी भी प्रकार की सुख व दुःख की […]

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विशेष सदाबहार कैलेंडर- 169

हार्दिक आभार सहित रविंदर भाई की कलम से- 1.प्रेम की धारा बहती है जिस दिल में, चर्चा उसकी होती है हर महफ़िल में. 2.बहुत कुछ सिखाया ज़िंदगी के सफर ने अनजाने में, वो किताबों में दर्ज था ही नहीं, जो पढ़ाया सबक जमाने ने. 3.हर एक लिखी हुई बात को हर एक पढ़ने वाला नहीं […]

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वेद एवं वैदिक धर्म हमें क्यों प्रिय हैं?

ओ३म् मनुष्य को जिन मनुष्यों, पदार्थों व वस्तुओं से लाभ होता है वह उसको प्रिय होती हैं? मनुष्य भौतिक वस्तुओं में नाना प्रकार के भोजनों, अपने घर, सुविधा की वस्तुओं सहित अपने परिवार जनों को प्रेम किया करते हैं व वह उन्हें प्रिय होते हैं। ऐसा होना स्वाभाविक व उचित ही है। इनके अतिरिक्त ऐसी […]

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वेदर्षि दयानन्द द्वारा स्थापित आर्यसमाज हमें प्रिय क्यों हैं?

ओ३म् संसार में अनेक संस्थायें एवं संगठन हैं। सब संस्थाओं एवं संगठनों के अपने अपने उद्देश्य एवं उसकी पूर्ति की कार्य-पद्धतियां है। सभी संगठन अपने अपने उद्देश्यों को पूरा करने के किये कार्य करते हैं। आर्यसमाज भी विश्व का अपनी ही तरह का एकमात्र अनूठा संगठन है। हमें लगता है कि आर्यसमाज के समान संसार […]

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मनुष्य को अपने लाभ के लिए ईश्वर की उपासना करनी चाहिये

ओ३म् मनुष्य मननशील प्राणी है। वह अपनी रक्षा एवं हित के कार्यों में संलग्न रहता है। अपनी रक्षा के लिए वह अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देता है तथा सज्जन पुरुषों से मित्रता करता है जिससे असुरक्षा एवं विपरीत परिस्थितियों में वह उसके सहायक हो सकें। मनुष्य अपनी सुख सुविधाओं का भी ध्यान रखता है। इसके […]

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देवयज्ञ अग्निहोत्र का करना मनुष्य का पुनीत सर्वहितकारी कर्तव्य

ओ३म् मनुष्य मननशील प्राणी को कहते हैं। मननशील होने से ही दो पाये प्राणी की मनुष्य संज्ञा है। मननशीलता का गुण जीवात्मा के चेतन होने से मनुष्य रूपी प्राणी को प्राप्त हुआ है। जड़ पदार्थों को सुख व दुख तथा शीत व ग्रीष्म का ज्ञान नहीं होता। मनुष्य का आत्मा ज्ञान प्राप्ति तथा कर्म करने […]

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हर्ष, उमंग एवं सद्भावना का त्यौहार : लोहड़ी

13 जनवरी लोहड़ी पर विशेष छोटी-छोटी खुशियों का संग्रह है ज़िंदगी। खुशियां का पूरा गगन किसी के भी पास नहीं है कि मनुष्य जब चाहे खुशी का सितारा तोड़ कर ज़िंदगी को श्रृंगार ले। मनुष्य ने मौसम, दिन, वातावरण, रीति रिवाज़, रिश्ते-नाते मोहब्बत, प्रेम, लगाव तथा परम्पराओं इत्यादि को मद्देनज़र रखते हुए हर्ष, चाव इत्यादि […]

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वेद वर्णित ईश्वर की न्याय-व्यवस्था आज भी सर्वत्र प्रभावी है

ओ३म् हमारा यह संसार स्वयं नहीं बना अपितु एक सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, अनादि, नित्य, न्यायकारी तथा दयालु सत्ता जिसे ईश्वर कहते हैं, के द्वारा बनाया गया है। इस संसार में एक त्रिगुणात्मक अर्थात् सत्व, रज तथा तम तीन गुणों वाली सूक्ष्म प्रकृति का अस्तित्व भी है जो प्रलयावस्था में सर्वत्र फैली व एक प्रकार […]

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धर्म सत्कर्तव्यों के ज्ञान व पालन और असत् कर्मों के त्याग को कहते हैं

ओ३म् धर्म के विषय में तरह तरह की बातें की जाती हैं परन्तु धर्म सत्याचरण वा सत्य कर्तव्यों के धारण व पालन का नाम है। यह विचार व सिद्धान्त हमें वेदाध्ययन करने पर प्राप्त होते हैं। महाराज मनु ने कहा है कि धर्म की जिज्ञासा होने पर उनका वेदों से जो उत्तर व समाधान प्राप्त […]

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मनुष्य जीवन व उसके लक्ष्य पर विचार

ओ३म् हमारा यह जन्म मनुष्य योनि मे हुआ था और हम अपनी जीवन यात्रा पर आगे बढ़ रहे हैं। हमें पता है कि कालान्तर में हमारी मृत्यु होगी। ऐसा इसलिये कि सृष्टि के आरम्भ से आज तक सृष्टि में यह नियम चल रहा है कि जिसका जन्म होता है उसकी मृत्यु अवश्य ही होती है। […]