धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सूर्य समान प्रकाशवान तथा अंधकार से रहित ईश्वर को हम जानें

ईश्वर है या नहीं? इस प्रश्न का उत्तर ‘ईश्वर है’ शब्दों से मिलता है। ईश्वर होने के अनेक प्रमाण हैं। वेद सहित हमारे सभी ऋषि आप्त पुरुष अर्थात् सत्य ज्ञान से युक्त थे। सबने वेदाध्ययन एवं अपनी ऊहापोह शक्ति से ईश्वर को जाना तथा उसका साक्षात्कार किया था। यजुर्वेद 31.18 मन्त्र ‘वेदाहमेतं पुरुषं महान्तमादित्यवर्णं तमसः […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म लेख

क्या हिन्दू है सबसे उदारवादी सहिष्णु धर्म ?

आदरणीय मित्र प्रदीप, संस्पर्श नमन् ! जब आप खुद ‘प्रदीप’ हैं, तो आपको स्वयं सहित दूसरे के घरों को भी उज्ज्वल करने चाहिए । कितने को सहयोग किया है, आपने ! जो आप प्रदीप कहलाते हैं । प्रदीप तो प्रकाशित करता दीपक होता है, फिर कैसे और क्यों प्रदीप हो गए आप ? कभी आपने […]

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बिहुला-विषहरी और मंजूषा चित्रकला

बांग्ला व फसली संवत-साल के भाद्रपद संक्रांति दिवस (17 या 18 अगस्त) को माँ बिहुला पूजा अथवा मनसा देवी व विषहरी पूजा बिहार, झारखंड और प. बंगाल के उस जिला में प्रचलित है, जो चंपानगर (वर्त्तमान भागलपुर) के निकटस्थ है । यह क्षेत्र ‘अंगिका पट्टी’ भी कहलाता है । लोक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव […]

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स्वस्थ मन सभी भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नतियों का आधार है

ओ३म् सामान्य मनुष्य आज तक अपनी आत्मा के अन्तःकरण में विद्यमान एवं कार्यरत मन, बुद्धि, चित्त एवं अहंकार उपकरणों को यथावत् रूप में नहीं जान पाया है। मनुष्य को मनुष्य उसमें मन नाम का एक करण होने के कारण कहते हैं जो संकल्प विकल्प व चिन्तन-मनन करता है। मनुष्य का मन आत्मा का करण है […]

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आत्मा एक अनादि द्रव्य है जिसकी सिद्धि उसके गुणों से होती हैं

ओ३म् संसार में अनश्वर एवं नश्वर अनेक पदार्थ हैं जिनकी सिद्धि उनके निजी गुणों से होती है। वह गुण सदा उन पदार्थों में रहते हैं, उनसे कभी पृथक नहीं होते। अग्नि में जलाने का गुण है। वायु में स्पर्श का गुण है, जल में रस है जिसे हमारी रसना व जिह्वा अनुभव करती है। इसी […]

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एक सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वव्यापक, सर्वज्ञ एवं सर्वशक्तिमान ईश्वर ही सबका उपासनीय है

ओ३म् हम इस सृष्टि में रहते हैं। हमारा जन्म यद्यपि माता–पिता से हुआ है परन्तु हमारे शरीर को बनाने वाला तथा इसका पोषण करने वाला परमात्मा है। वह परमात्मा कहां है, कैसा है, उसकी शक्ति कितनी है, उसका ज्ञान कितना है, उसका आकार कैसा है तथा उसकी उत्पत्ति कब व कैसे हुई, यह ऐसे प्रश्न […]

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मनुस्मृति संसार का प्राचीन श्रेष्ठ ज्ञान है जिसका सबको अध्ययन करना चाहिये

ओ३म् सृष्टि के आरम्भ में परमात्मा से चार वेदों का आविर्भाव हुआ था। वेद ज्ञान व सत्य विद्याओं को कहते हैं। चार वेदों में ज्ञान, कर्म और उपासना सहित विज्ञान विषयों का वर्णन है। वेदों के प्रमुख विद्वान 6 दर्शनकार, 11 व अधिक उपनिषदकार, महर्षि पाणिनी, महर्षि यास्क एवं ऋषि दयानन्द जी हुए हैं। महर्षि […]

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ईश्वर को जानने व उपासना करने के लाभ

ओ३म् मनुष्य का आत्मा चेतन, अनादि एवं एक अल्पज्ञ सत्ता है। परमात्मा ने मनुष्य को ज्ञान प्राप्ति व ज्ञान में वृद्धि करने के लिए बुद्धि व मन आदि  इन्द्रिय व अवयव दिये हैं। इनकी सहायता से मनुष्य अपनी आत्मा के ज्ञान में वृद्धि कर सकता है। ज्ञान की आवश्यकता क्यों है? मनुष्य को जीवन में […]

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संसार में अनादि पदार्थ कौन-कौन से व कितने हैं?

ओ३म् हम संसार में सूर्य, चन्द्र, पृथिवी आदि अनेक लोकान्तर तथा पृथिवी पर अनेक पदार्थों को देखते हैं। हमें यह जो भौतिक दिखाई देता है वह सृष्टिकर्ता ईश्वर की अपौरुषेय रचना है। वर्तमान में भी कुछ पदार्थ मौलिक तत्वों की परस्पर रासायनिक क्रियाओं वा विकारों से भी बनते हैं। हमारे शास्त्र भौतिक जगत में पांच […]