कहानी – पैसे का खेल
लुधियाना से चंडीगढ़ जाती मुख्य सड़क पर एक भीषण दुर्घटना हो गई, एक तेज रफ्तार बस ने एक साइकिल सवार
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Read Moreसुबह के 6 बजे थे। मिथिलेश अपनी साइकिल पर सवार होकर स्कूल की तरफ़ निकल चुका था। रास्ते में धुंध
Read Moreअवनीश जी अपनी ज़िंदगी की साठ बसंत देख चुके थे। रिटायरमेंट के बाद उनका दिन अखबार, चाय और बालकनी में
Read Moreरात के 2 बज चुके थे। अनाया अपने कमरे की खिड़की के पास बैठी, बाहर पसरे स्याह अंधेरे को निहार
Read Moreगांव के छोर पर बना वह प्राथमिक विद्यालय बरसों से मास्टर केशवराम की पहचान था। पूरे इलाके में लोग उन्हें
Read Moreअम्मा को, जब से हमने होश संभाला था, बस एक ही बात बार-बार दोहराते देखा था—“अच्छी चीज़ को रोज़ इस्तेमाल
Read Moreहरियाणा के एक छोटे-से कोने में बसा था छतरपुर गाँव। गाँव छोटा था, लेकिन उसके रिश्तों की दुनिया बहुत बड़ी
Read Moreसमय चक्र घूमता रहा। मालती अपने परिवार के सुख-दुःख में ऐसे उलझी रही कि मायके जाकर अपने माता पिता के
Read Moreदिल्ली की वह शाम कुदरत का कोई नायाब करिश्मा थी। आसमान सुर्ख लाल रंग में रंगा था और हवाओं में
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