गीत
अंतरमन का मौन संवाद (गीत)—मंजूषा श्रीवास्तव “मृदुल”मन के भीतर कोई चुपकेधीरे-धीरे गाता है,मौन बने उस संवादों मेंसच अपना मिल जाता
Read Moreहे धन्य श्रमिक! तुम स्वेद – स्नेह दे,जीवन – दीप जलाते हो।धरती माँ के सच्चे सपूत,श्रम का शुभ चक्र चलाते
Read Moreआर्य समाज की विचार क्रांति का फैला नया उजाला ।सत्यार्थ प्रकाश है ग्रंथ ऐसा, बुद्धि बदलने वाला।। आडंबरों का हुआ
Read Moreकमल ही कमल खिल रहा देश में, मोदीराज की आंधी आई,जिसने किया कल्याण देश का,घर घर मन की बात पहुंचाईअब
Read Moreबौराए हैं आम बाग मेंमहक रही है अमराई। ऋतु वसंत का हुआ आगमनकुहुक-कुहुक कोकिल कूकेकानों में अमृत घुलता हैनहीं एक
Read Moreअपना सामां बांध बटोही सांझ हुई चल घर चलते हैं।कल आया तो कल देखेंगे सांझ हुई चल घर चलते हैं।।
Read Moreव्यग्र विकल चिंतारत रहते, उन में पर्व भरें उत्साह ।मानव मन आनंदित होता, पर्वों से संचार प्रवाह ।। नवल राग
Read Moreपल-पल मिलना, पल-पल खिलना, पल-पल बिछड़न ही जीवन है। धोखा, कपट, षडयंत्र तो विष हैं, प्रेम की धड़कन संजीवन है।।
Read More