दोहा मुक्तक
अपनापन की आड़ में, बढ़े स्वार्थ का भाव।मीठी वाणी बोलकर, देते गहरे घाव।।आया ये कैसा समय, कैसा इसका रंग,सजग सदा
Read Moreअपनापन की आड़ में, बढ़े स्वार्थ का भाव।मीठी वाणी बोलकर, देते गहरे घाव।।आया ये कैसा समय, कैसा इसका रंग,सजग सदा
Read Moreबड़ा एक प्यारा ख़ज़ाना है हिन्दी।हमारे लिए तो ज़माना है हिन्दी।फकत एक दिन प्यार देना नहीं हैलगातार अच्छी बनाना है
Read Moreसब में एक हिंदी अपना ज्ञान है, हिंदी ही सम्मान।हिंदी के हम भक्त हैं, हिंदी ही प्रज्ञान।।हिंदी भी यह जानती,
Read Moreबोल-तोल बदले सभी, बदली सबकी चाल ।परभाषा से देश का, हाल हुआ बेहाल ।। जल में रहकर ज्यों सदा, प्यासी
Read Moreआन-बान सब शान है, और हमारा गर्व।हिंदी से ही पर्व है, हिंदी सौरभ सर्व।। हिंदी हृदय गान है, मृदु गुणों
Read Moreनशा नाश का कारण घातक, हैं जानो। बीडी, तंबाकू तन नाशक, हैं मानो। तन-मन जीवन यह संहारक, हत्यारा — धन
Read Moreदीप पर्व की आपको, खुशियां मिले अनंत,दौर चलें मिष्ठान के, खारा मिले तुरंत। दीप कभी जलता नही, दीवाली की रात,तेल
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