सावन को आने दो
दिनकर की स्वर्णिम किरणों ने,धरती का सुंदर रूप सजाया ,काले मेघो ने सूरज के संगआँख मिचोली खेल रचाया,अब तो रिम
Read Moreदिनकर की स्वर्णिम किरणों ने,धरती का सुंदर रूप सजाया ,काले मेघो ने सूरज के संगआँख मिचोली खेल रचाया,अब तो रिम
Read Moreधड़ाधड़ बिकने की इस बेला मेंआप याद बहुत आते हो मान्यवर,आपके विचारों पर अडिग रहने की कलासदियों तक रहेगा अजर
Read Moreमाटी का यह घर कहे, सुन लो मेरी बात,दीवारों में कैद हैं, अब गुजरी औकात॥ कभी जला चूल्हा यहाँ, गूँजी
Read Moreसमुद्री लहरों से लड़ते-लड़ते,जीवन जिनका यूं बीत गया।इस देश की साँसें चलती रहीं,उनका नाम कहाँ पे खो गया। वे सीमा
Read Moreआसान नहीं होताछुट्टियों के बादबच्चों को वापस विदा करना ।साथ ले जाते हैं वेसारी खिल-खिलाहट,मुस्कुराहट और खुशबू ।ले जाते हैं
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