न्याय मशाल : नवी पिल्लई को नमन
जिसने अन्याय के आगे झुकना नहीं सीखा,जिसने अत्याचारों के आगे रुकना न सीखा।मानवता की पीड़ा को अपना दर्द है बनाया,नवी
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Read Moreशाम हुई तो सूरज सोचे,सारा दिन बेकार जले थे । थके बैठ मुसाफिर सोचे,क्यों जिंदगी से हार चले थे ।
Read Moreकिताब हाथों में लेकर बसलहरा देना काफी नहीं,भीड़ में खुद को जन-नायकदिखा देना काफी नहीं,मंच से ऊंचे स्वर में सिर्फ़
Read Moreफागुन में नैना मिले, चैत गले का हार।बैसाखी पाती लिखी, जेठ हुआ गुलज़ार।। आषाढ़ संग भीगे सपने, सावन मधुर संगीत।भादों
Read Moreकलश सजाकर द्वार पर, दीप जलाएँ आज।माँ दुर्गा के नाम से, महके आँगन साज।। नौ दिन माँ के नाम हैं,
Read Moreबहाने मत बनाओझूठी जिंदगी जीने के लिएजिंदगी को मिले हैंकुछ रंगीन पलइसे हवा में मत उछालोएक दिन तूम्हारी औकातशून्य को
Read Moreसमय समय के खेल में, कैसे-कैसे खेल।कहीं खुशी के दीप हैं, कहीं विरह की बेल॥ रिश्तों में दिखने लगे, कैसे-कैसे
Read Moreख़ुश रहने को सब कुछ होना ज़रूरी नहीं,हर ख़्वाब का पूरा होना ज़रूरी नहीं,जो मिला है,उसमें मुस्कुराना सीखिए,हर पल को
Read Moreनवरात्रि के प्रथम दिवस पूजी जातीं माँ शैलपुत्री,पर्वतराज हिमालय की पुत्री, जग की पालनहारी।वृषभ पर आरूढ़ होकर ‘वृषारूढ़ा’ कहलाती हैं
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