रोने पर मरने वाले की बस तलाश में हैं हम
रोया आकाश,भीगी स्मृतियों में,चुप है पथ। सूनी चौखट,कदमों की आहट,ढूँढ़े मन। बुझते दीपक,धुएँ की लकीरों में,चेहरा खोया। टूटी प्रतिध्वनि,वक्त के
Read Moreरोया आकाश,भीगी स्मृतियों में,चुप है पथ। सूनी चौखट,कदमों की आहट,ढूँढ़े मन। बुझते दीपक,धुएँ की लकीरों में,चेहरा खोया। टूटी प्रतिध्वनि,वक्त के
Read Moreजप, तप, नाम, व्रत, परमार्थसब बेकार से लगते हैं।झूठ, कपट, आँसू, द्वेष, कामसब साकार से लगते हैं।जब जीवन के झंझावातचरमोत्कर्ष
Read Moreसुना था, दीवारों के कान होते हैं,मगर अब तो दीवारें ही नहीं हैं।दीवारें नहीं हैं शर्म की,दीवारें नहीं हैं अब
Read Moreजीवन में योग को अपनाइए, रोगों को दूर भगाइए,चेहरे की स्वर्णिम कांति संग जीवन “आनंद” बढ़ाइए ।चंचल मन को समझाइए,
Read Moreशब्द कभी केवल शब्द नहीं होते,वे समय के दस्तावेज होते हैं,जो लिखे जाते हैंसदियों की चुप्पियों के बीच,और पढ़े जाते
Read Moreजीवन का भी अजीब खेला है,बस दो दिनों का मेला है।सब माया मोह का जाल है,सबका भ्रम में जीने से
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