गीत – चरणों शीश झुकाता
प्रथम पूज्य की करे अर्चना, रिद्धि-सिद्धि के है दाता ।दयावंत हे बुद्धि प्रदायक, जन-जन के भाग्य विधाता ।। प्रथम पूज्य
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Read Moreमेरी जाति जानने के इच्छुक मेरे नन्हे विद्यार्थियों,अब मैं तुम्हें रोज नई बातें सिखाऊंगा,जाति पांति जरूरी या मजबूरी नहीं बताऊंगा।लील
Read Moreऊँचे पहाड़ों पर सफर,पुरवाई पवन का शोर।ये हरे- भरे वन हमें,करते भाव – विभोर। कोहरे बादल की छाँव कहीं,कहीं झलकते
Read Moreबावन गढ़ों का समूह है हमारा,प्रकृति की चंचलता नभ का तारा।देश की आन-बान शान का नारा,पूछती हूं कौन सा पथ
Read Moreराजनीति ने फिर हिंदी की, चुन्नी आज उछाली है।लाज छोड़़कर एक हो गया, ग्राहक एवं माली है।उठो कलम के प्रखर
Read Moreलो आ गया राजभाषा हिन्दी दिवससब मिल करें हिन्दी का गुणगानएक साथ मिलकर सब शपथ लेंदिलवाएंगे राष्ट्रभाषा का स्थान। पूरब,पश्चिम
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