बेटियां हमारी
हमारी बेटियांसमाज की निगाहों सेअब भीअसुरक्षित महसूस करती हैंजब घर से निकलकरस्कूल, कालेजया बाजार जाती हैंगंदी निगाहेंघूरना चालू हो जाती
Read Moreहमारी बेटियांसमाज की निगाहों सेअब भीअसुरक्षित महसूस करती हैंजब घर से निकलकरस्कूल, कालेजया बाजार जाती हैंगंदी निगाहेंघूरना चालू हो जाती
Read Moreजिस घर में नारी का सम्मान होता है,वहीं प्रेम का पावन स्थान होता है।जहाँ उसकी मुस्कान बनी रहे सदा,वहीं सुख-समृद्धि
Read Moreबहुत कर लिए मौज मस्तीअब आओ कुछ काम करें,बदनामी तो बहुत सह लिएअब तो चलो कुछ नाम करें,धुंध छांटकर आलस
Read Moreहाँ, कच्ची दीवारों पर जब, संजा मुस्कुराती थी,मिट्टी-गोबर-फूलों से बेटियाँ दुनिया सजाती थीं।नन्ही-सी उँगलियों में पूरा “गाँव” उतर आता था,हर
Read Moreबॉंधे जाते हैं मन्नतों के धागे,इस आस में रुका सौभाग्य जागे,करुण प्रार्थनाएं परमेश्वर सुन ले,लाखों की भीड़ में हमें बस
Read Moreसत्य घायल हो सकता हैपराजित नहींएक वीर योद्धा होता हैवह मौका देता है असत्य कोसुधर जाने कापर असत्य चालबाज़ होता
Read Moreविधा- कविता शीर्षक- बदलता समाज बदलता हुआ समय है, बदलता समाज है,जैसा समाज कल था वैसा नहीं रहा आज है,संस्कार
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