बदलता समाज
विधा- कविता शीर्षक- बदलता समाज बदलता हुआ समय है, बदलता समाज है,जैसा समाज कल था वैसा नहीं रहा आज है,संस्कार
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Read Moreविधा- कविताशीर्षक- हिंदी, भावों की सहज अभिव्यक्ति हिंदी हमारी आन-बान शान-पहचान हैभावों की सहज अभिव्यक्ति इसकी जान है,सहज अभिव्यक्ति से
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- हिंदी खुद अपनी पहचान शब्द-शब्द में हिंदी भाषा,कण-कण में है हिंदुस्तान,हिंदी है तो हम जीवंत हैं,हिंदी खुद अपनी
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- तेरी परछाईं! मेरे साथ चलती है मेरी परछाईं,लगता है साथ मेरे तू चलती आई,आज क्यों दूर-सी खिसक रही
Read Moreमिट्टी ने कभी नहीं पूछा—“मुझे क्या बनना है?”बस किसी शिल्पी के हाथों मेंख़ुद को सौंप दिया। हर चोट जो उस
Read Moreएक और आज़ादी चाहिएसरहदों की जंग तो जीत ली हमने,मगर घर में ये कैसा कोहराम है?जिस आज़ादी के लिए बहे
Read Moreमैंने उसको देखाएक गंभीर चेहरे के साथउदासी भरपूर थीतीस वर्षीय एक युवती कोयौवन से परिपूर्णलहराते बालगौर वर्ण से सुसज्जित थीहाथों
Read Moreसंवेदनशील व्यक्तिएक विश्वास देता हैकुछ समय के लिए ही सहीवह आपके हृदय में उतरता हैसच को डूबने नही देता हैएक
Read Moreदुआ वो दौलत है,जिसके आगे ताज भी झुक जाता है,जिसके लिए अमीर भी हाथ उठाकर माँगता है।बद्दुआ वो आग है,जो
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