लघुकथा – आख़िरी पेड़ का इंटरव्यू
पृथ्वी पर केवल एक पेड़ बचा था। उसे काँच के विशाल गुंबद में सुरक्षित रखा गया था। दुनिया भर के
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Read Moreबड़े साहब का अचानक विभागीय दौरा आ गया, पूरे विभाग में भगदड़ मच गई। कोई फाइल लेकर इधर से उधर
Read Moreसर्दियों का आग़ाज़ हो चुका था। क़श्मीर की हसीन वादी पर सफ़ेद बर्फ़ की चादर बिछने को बेताब थी। ‘श्रीनगर’
Read Moreशहर में एक नया बैंक खुला—“यादों का बैंक”। यहाँ लोग पैसे नहीं, अपनी यादें जमा करते थे। खुशियों की यादों
Read Moreमेरी डायरी के ये धूल-धूसरित, उदास पन्ने और उनकी हर पंक्ति में सांस लेती तुम्हारी स्मृतियां…आज फिर मैंने इन्हें पलटा,
Read Moreकवि सम्मेलन की नामचीन हस्तियांश्री शैल चतुर्वेदी औरश्री बशीर बद्रशैल जी का आग्रहवाणी वंदना के बाद मुझे पढ़ाएंसंचालक डॉक्टर सतीश
Read Moreरीना को लोग अक्सर “गलत फैसले लेने वाली औरत” कहते थे। लेकिन कोई उसकी कहानी पूरी सुनना नहीं चाहता था।
Read Moreमैं अपने बरामदे में बैठा पहाड़ों की खूबसूरती को देख रहा था । इस बार कई सालों के बाद मैं
Read Moreशाम ढल रही थी, और रेलवे स्टेशन के पुराने पीपल के पेड़ पर परिंदों का शोर धीरे-धीरे थम रहा था।
Read Moreचंबल की सुलगती फ़िज़ाओं में सिर्फ़ बारूद की तीखी गंध और ख़ून के कतरे ही नहीं तैरते थे, बल्कि एक
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