शून्य
छुटकी संजना कब से रोये जा रही थी।अभी-अभी बडे भैया अमित की शादी हुई थी। कितनी उमंग, कितना जोश, कितना
Read Moreपंद्रह साल से रमेसर उनके घर में था। सेठ हरिप्रसाद उसे बेटे की तरह मानते थे — कम से कम
Read Moreकुछ संस्मरण सकारात्मकता के साथ ही साथ उत्प्रेरक भी होते हैं जिन्हें साझा कर हम स्वयं के साथ-साथ इसके पाठकों
Read Moreक्लिनिक में एक युवा लड़की आई — चेहरा सुंदर, लेकिन बेचैनी साफ झलक रही थी। डॉक्टर ने चश्मा ठीक किया
Read Moreकमलाबाई का नाम पूरे मोहल्ले में बहुत मशहूर था ,कहने को तो वह एक काम वाली थी, चार-पांच घरों में
Read Moreविमल सुबह नौ बजे ही पहुँच गया था मेरे घर। हम दोनों को अपने पुराने मित्र से मिलने शहर से
Read Moreमैं हास्य-व्यंग्य से समाज को सुधारने की कोशिश करता हूँ और एक सच्चे भावों से सच्चाई लिखना चाहता हूँ। आम
Read Moreकॉलेज की फिज़ाओं में एक नाम गूंजता था, अमन आरिफ़। वह एक संजीदा फ़िक्र नौजवान, जिसकी दुनिया किताबों, शायरी और
Read Moreशहर की सुबहें हमेशा भागमभाग वाली होती हैं। ट्रैफ़िक का शोर, हॉर्न की आवाज़ें, और टैक्सी स्टैंड पर भीड़। उसी
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