मंकी मदर
रोहित का देश के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में चयन हो गया था। घर में मानो दीपावली उतर आई थी।
Read Moreविद्यालय का वार्षिक उत्सव समाप्त हुआ और के.जी. में पढ़ने वाली नन्ही मिनी भागकर मीनाक्षी के गले आ लगी। “मम्मी!
Read Moreप्रिय अमन,मेरी आँखों के तारे, नूर‑चश्म,बेटा,तुम बचपन में मेरे कंधे पर सिर रखकर ज़िद किया करते थे, कभी नए खिलौने
Read Moreप्रथम अध्याय — “जब हमारा संसार बस एक आँगन था” सूरज की पहली किरण अभी धरती पर पूरी तरह उतरी
Read Moreराघव एक साधारण किसान परिवार का युवक था, जो सेना में भर्ती होकर देश की सीमा पर तैनात हो गया
Read Moreमहानगर की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह भी जैसे घड़ी की सुइयों के इशारे पर होती है। यहाँ लोग बस
Read Moreदिन ढलते ही शहर की रौनक बदल जाती थी। एक तरफ़ इत्र की ख़ुशबू और दूसरी तरफ घुंघरूओं की झनकार।
Read Moreशाम का सहर तारी था, और कमरे में रखी पुरानी मेज़ लैंप की धीमी रोशनी में नहाई हुई थी। अनवर,
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