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बुज़ुर्ग असलम साहब ने अपनी पूरी ज़िंदगी का एक-एक तिनका जोड़कर अपने इकलौते बेटे, फ़रहान, को इस क़ाबिल बनाया था
Read Moreबुज़ुर्ग असलम साहब ने अपनी पूरी ज़िंदगी का एक-एक तिनका जोड़कर अपने इकलौते बेटे, फ़रहान, को इस क़ाबिल बनाया था
Read Moreशहर की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी, ऊंची इमारतें और मसनूई रोशनियां कभी कभार इंसान को अंदर से बिल्कुल ख़ाली कर देती
Read Moreमेरे पिताजी छह भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उन्होंने उम्र से पहले जिम्मेदारियों का भारी बोझ अपने कंधों पर उठा
Read Moreबुधिया के गाँव में सरकारी योजनाएं आईं — राशन, गैस, बिजली बिल माफी, नकद। बुधिया खुश था।पहले साल उसने काम
Read Moreउस बड़े से पुश्तैनी ज़मीन की में अगर किसी का पसीना और त्याग छुपा था, तो वह सिर्फ़ बड़ा भाई
Read Moreपहाड़ों की ओट से जब सूरज की पहली किरन निकलती, तो वादी-ए-चिनार सुर्ख़ सुनहरी रोशनी में नहा जाती। इसी वादी
Read Moreस्टेशन उस शाम असामान्य रूप से भरा हुआ था। बरसात अभी-अभी थमी थी और प्लेटफ़ॉर्म की भीगी ज़मीन पर भागते
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