नई ज़िंदगी
यह उस दौर की बात है जब इश्क़ ज़मानों और सरहदों का मोहताज नहीं हुआ करता था, बल्कि दो दिलों
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Read More.. और अपने हिस्से की सारी तकनीकी पढ़ाई समाप्त कर लेने के बाद भी जब कोई प्लेटफ़ॉर्म नहीं मिला तब
Read Moreपिछले कुछ दिनों से आशा फोन पर बहुत कम ही बात करती थी। कारण स्पष्ट था, ए आई के आने
Read More(1)मुरलीधर रिक्शा से उतरे। मालती को भी उतरने का संकेत किया।“यह फलों की टोकरी कहाँ रख दूँ बाबू जी!” रिक्शावाले
Read Moreप्रेम का भाव लिए प्रेमी-प्रेमिका अपने मन की बाते कर रहे थे। वे दोनों चाहते थे कि उनका प्रेम अमर
Read Moreशाम की छाया गहरी हो रही थी। महाविद्यालय की उस पुरानी और ऐतिहासिक पुस्तकालय की खिड़की से बाहर का दृश्य
Read Moreशिक्षकीय जीवन में प्रतिदिन न जाने कितने चेहरे सामने आते हैं। कुछ चेहरे समय के साथ धुंधले पड़ जाते हैं,
Read Moreबहुत साल हो गया गुरु जी को हमने याद नहीं किया। और गुरु जी को भी हम कहां याद रहे
Read Moreक्लर्क प्रताप नारायण जाटव की मेज़ पर फ़ाइलें रुकती थीं — महीनों, सालों। पर वे रुकती तभी थीं जब लिफ़ाफ़ा
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