“एक आह” हसरतों के नाम
मैं उस दिन स्कूल में बतौर परीक्षक-इम्तिहान मौजूद था। स्कूल के हॉल में ख़ामोशी का राज़ था, सिर्फ़ क़लम के
Read Moreमैं उस दिन स्कूल में बतौर परीक्षक-इम्तिहान मौजूद था। स्कूल के हॉल में ख़ामोशी का राज़ था, सिर्फ़ क़लम के
Read Moreकॉलेज का पहला दिन आज भी याद है। नए चेहरे, नई कक्षाएँ और दिल में अनगिनत सपने। शुरुआत में सब
Read Moreहर वर्ष की भांति इस बार भी माहेश्वरी जी अनाथ कन्याओं के कन्यादान का पुनीत कार्य कर रही थीं। विवाह
Read More“मम्मी, अभी नहीं… शाम को ले आएँगे।” मेरे इतना कहते ही माँ की आँखें कहीं दूर टिक गईं। धीमे स्वर
Read Moreशिक्षकीय जीवन में प्रतिदिन न जाने कितने चेहरे सामने आते हैं। कुछ चेहरे समय के साथ धुंधले पड़ जाते हैं,
Read Moreबारिश कह रही थी मानो आज ही बरसना है, सिर्फ एक किलोमीटर दूर मंज़िल.. पर मंज़िल तक जाना ही सबसे
Read Moreमैं अपने बीमार और वृद्ध पिता को काशी के मुक्ति भवन ले जा रहा था। मन में एक ही उम्मीद
Read Moreऐसा पहली बार हुआ था कि नंदिनी घर से बाहर निकली और आदतन पलटकर पीछे देखा, पर उसे विदा करने
Read Moreऑफिस की लिफ्ट खराब थी। 8वीं मंजिल। बॉस ने सुबह ही कह दिया था – “रिपोर्ट आज चाहिए, नहीं तो
Read Moreगांव के बाहरी छोर पर बने उस पुराने घर में कभी बहुत रौनक हुआ करती थी। घर के आंगन में
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