दोस्तों के बीच दबी ज़ुबान में उनके इश्क़ की चर्चाएं आम थीं
सालों बीत गए। शहर के उस मशहूर बीएड कॉलेज की वो चहल-पहल, वो नई उम्र, नए अहसास और आंखों में
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Read Moreसाहित्यिक पटलों के माध्यम से संपर्क में आने और महज दो-तीन बार के आभासी संवाद के बाद नीलिमा ने राज
Read Moreरास्ते में जल्दी-जल्दी चलते हुए राकेश का पैर वहाँ पड़े एक पत्थर से टकराया।“उफ़! यह पत्थर भी न। इसे भी
Read Moreमनुष्य एक भावना प्रधान प्राणी है उसकी भावनाएं ही उसके सुख दुख की साथी होती हैं,स्थिति प्रतिकूल हो तो दुख
Read Moreदूर-दूर तक जंगलों, पहाड़ों चट्टानो के बीच एक छोटा सा घर, जिसमें सिर्फ तीन लोगों का बसेरा था, लेकिन सपनों
Read Moreजंगल मे चिड़िया समुदाय की मीटिंग चल रही थी ।इस मीटिंग में कुछ ज्वलंत मुद्दे जैसे -पानी की समस्या, घोंसला
Read Moreयह कहानी किसी एक शख़्स की नहीं, बल्कि हर उस दिल की है जिसने मोहब्बत में सिर्फ़ पाना नहीं, बल्कि
Read Moreखेती -किसानी के साथ-साथ साहित्य सृजन का कार्य वह कड़ी मेहनत व दिल लगाकर करता था । बाहर कम ही
Read Moreवालिद साहब (पिताजी) के इंतक़ाल को अभी चंद ही महीने हुए थे कि घर की फज़ा (माहौल) बिल्कुल बदल गई।
Read Moreसुबह के क़रीबन नौ सवा नौ का ही समय होगा । दिल्ली मेट्रो हर रोज़ की तरह खचाखच भरी हुई
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