ढल गए टल गए
ढल गए टल गए, दिन कहाँ वे रहे,वक्त आया किए और फिर चल वे दिए;दर्द कुछ थे दिए, सर्द कुछ
Read Moreढल गए टल गए, दिन कहाँ वे रहे,वक्त आया किए और फिर चल वे दिए;दर्द कुछ थे दिए, सर्द कुछ
Read Moreघने सर्द कोहरे को रुख़ से हटाकर,नया साल आया, नया साल आया।वो माज़ी के हर दर्दो-ग़म को भुलाकर,नया साल आया,
Read Moreधूम-धड़ाम तड़ाक धड़ाक, बजत ढोल मृदंग नहीं,मद्य-मत्त मद-अंध मनुज, करत कुत्सित ढंग कहीं।बर्फ-तुषार ठिठुरत रैन, न कोई पात न फूल
Read Moreजो कल थे वे आज नहीं है,आनी है सबकी बारी ।हम भी काम करे कुछ ऐसे, याद करें दुनिया सारी
Read Moreइंसान नज़र आता बंजर हूँ मैंठोकरों से देखो बना पत्थर हूँ मैं टूटे एहसास,टूटे ख्वाब-ख्वाहिशेंमेरी खुशियों के महल , इमारतेंतिरस्कार
Read Moreजाता वक़्त कह रहा हमसे मन की गांठे खोलो प्रिय।दुर्भावना मिटा कर सारी मन को मन से जोड़ो प्रिय। चुक
Read Moreपारस्परिक विचार- विमर्श से हीसम्बन्धों की प्रगाढ़ता बढ़ती हैवर्ना आप ही बताओ एक हाथ सेक्या ताली कभी भी बजती है।।
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