कविता
बचपन की अरुणिम किरणों कासाथ लिए,मुस्कुराते हुए जीवनआगे बढ़ता है।स्मृतियों के नन्हे कण भी,दूर क्षितिज परचमकते प्रतीत होते हैं।यौवन की
Read More(यादें शेष : सुमन कल्याणपुर)स्वर की सरिता में मधुर गीतों से घुलता ‘प्रेम’ निराला,कोमल तानों की पहचान, ‘सुमनजी’ का अद्भुत
Read Moreगाँवयानि गरीबीफटेहाल जिन्दगीऔरकुछ गन्दगी। गाँवयानि सन्तुष्टिमानवता -निश्छलताप्रकृति से नजदीकीछल रहित जिन्दगी। गाँवयानि परम्पराओं का निर्वाहईश्वर में आस्थाशिक्षा का अभावसंस्कारों का
Read Moreकठिनाइयों से लड़ना होगाधैर्य नहीं हमको खोना होगा। बिना विचारे कोई कार्य न करें,चलें हमेशा बिना सहारे ही । मन
Read Moreलड़कियों के जन्म के बादमाएँ रोयींपिता का मन उदास हो गयाउदास हो गएरिश्तेदारों के चेहरेसब मन -ही मन दुखी थेकेवल
Read Moreनए घर में शिफ्ट हुए कुछ ही दिन हुए थे कि एक कबूतर का जोड़ा हमारे घर के मंदिर की
Read Moreमैं नारी हूं कोमल और अडिगमैं ममता की छांव, संघर्ष की आग, चूल्हे की लौ हूंरण की हुंकार, दुर्गा का
Read Moreयूं ही जज़्बातों से बयां करते हैं,यहाँ कोई सबूत भी रखते नहीं।कुछ रिश्ते सिर्फ दिल में होते हैं,हर किसी को
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