इतिहास
वह था एक जर्जरघर का , उपेक्षित कमराइतिहास के किसी एक गर्वितदुर्ग में,जो सबसे उच्च होनेके भ्रम में थामगर उसे
Read Moreपहाड़ों का सीना चीरकर जोचश्मे बाहर आते हैं,वे पानी का बहाव नहीं, धरतीकी धड़कन बन जाते हैं।जब टकराते हैं राहों
Read Moreशहरों की अंधी दौड़ से जबथककर चूर होते हैं,तब इन अडिग पहाड़ों के हमथोड़े करीब होते हैं।ये वीर वन,ये ऊंचे
Read More‘सत्ता’ बदली, बदले चेहरे, बदले शासन के व्यवहार,सवाल वही फिर उठा, किसका घर-क्या?अधिकार। कहतीं राबड़ी दृढ़ स्वर में, “नहीं छोड़ेंगे
Read Moreमत भूल, नारी केवल घर की नहीं,समाज और सभ्यता के सम्मान की पहचान होती है,संस्कारों की धड़कन, परिवार की मुस्कान
Read Moreकवि कुछ ऐसा गान लिखोकिअंतर्मन की चेतना जागृत हो,गूंज से दिगंत गुंजित हों,अन्तस् परिवर्तित हो,जीवन मोहक हो, रसवंत हो,अंतर्द्वंद्व-अंतर्कशाय विलुप्त
Read Moreउन रंगीन महफ़िलों की नुमाइश! बनके रह गई औरत ।मिलती आज, हर गली- नुक्कड़ चौराहे पे तबायफ ।। मैं! पूछती
Read Moreश्रम साधक का बहे पसीना।चाहे सुख से वो भी जीना।।करना चाहे सपने पूरे।जो भी अब तक रहे अधूरे।। श्रम साधक
Read More