प्रतापगढ़ की बिटिया
प्रतापगढ़ की बिटियाबेहद लाचारपढ़ना चाहती है दुनिया की बच्चियों की तरहवह भी जाना चाहती है स्कूल वह भी उड़ानभरना चाहती
Read Moreप्रतापगढ़ की बिटियाबेहद लाचारपढ़ना चाहती है दुनिया की बच्चियों की तरहवह भी जाना चाहती है स्कूल वह भी उड़ानभरना चाहती
Read Moreसोचती हूँ, तुम्हें श्वेत पन्नों पर उतार दूँ,मगर मेरी लेखनी की सामर्थ्यहर बार कम रह जाती है। चाहा कि बाँध
Read Moreधधकती धूनी, तपता गगन,मौन साधना में लीन है तन।राख में लिपटी आँखें है बंद,मन पहुँचा किसी और छंद। विदेशी होकर
Read Moreवे लोगजो तमंचों के बल परजीतना चाहते हैं जंग उनके अंदरअपनी मौलिक ताकतकमजोर हो चुकी है वे डरें हैंसामने वाले
Read Moreमां तो माँ हैचाहे वो किसी छप्पर में रहती होया किसी राजमहल में वह मां होती हैअपने बच्चों के लिएबच्चा
Read Moreवन्दे मातरम् की गूंज उठी, भारत माँ की शान,राष्ट्रगान-सा दर्जा पाकर, हर दिल की पहचान।माटी की खुशबू इसमें, नदियों का
Read Moreमॉं जब-जब हॅंसती है,बड़ी ही प्यारी लगती है,जादू भरी उसकी मुस्कान,हर गम मेरा हर लेती है । मॉं जब भी
Read Moreकागज़ की कश्तीभीगी नदियों पर चलती हैबालपन की हँसी मेंसमय तैरता जाता है छोटे से हाथों की दुनियाबड़ी उम्मीदें समेटे
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