गरीब माँ
उसकी हाथों की लकीरे मिटती गई,लोगो के झूठे बर्तन मांज मांज कर,उसकी छाती पे धूल जमती रही,लोगो के गंदे घर
Read Moreममता की छाँव भुला देती है सरे दुःख,माँ की सेवा में है जीवन का सारा सुख,’माता की सेवा इस जग
Read Moreमाँ सुनाती थी मुझको लोरीमीठी जैसे शहद की गोली।जैसे चंदा की शीतल छायानिंदिया रानी फैलाये माया। अपनी बाहों में भर
Read Moreस्मार्ट शहर की चकाचौंध में, खो गई गौमाता,सीमेंट की सड़कों पर, किसे याद है वो नाता।पहले आँगन में बंधकर, घर
Read Moreवकील साहबएक हत्या के मामले मेंकेस देख रहे थे उनके मित्र जज थेउन्हीं के अदालत मेंमुकदमा चल रहा था वकील
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