कविता

कविता

मौन अधर

मौन अधर हैं, पलकें बोझिल,प्रेम अनावृत धार रहा,स्वार्थ-पूर्ण इस मरु-दुनिया में,दिव्य-स्नेह विस्तार रहा। प्रिय की एकाग्रता अनूठी,शब्दहीन संधान करे,नित निष्काम

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