आजकल का युवा
आजकल का युवातनावग्रस्त होकरखीज और कुढ़न में जी रहा है । फैशन परस्ती में फंसकरसिर के बालों में नये-नये आकार
Read Moreआजकल का युवातनावग्रस्त होकरखीज और कुढ़न में जी रहा है । फैशन परस्ती में फंसकरसिर के बालों में नये-नये आकार
Read Moreमूक हुई किलकारियाँ, गुम बच्चों की रेल।गूगल में अब खो गये, बचपन के सब खेल॥ आँगन सूना हो गया, चुप
Read Moreकभी आईने में खुद को देखा था,तो आँखों में एक सपना चमकता था…नाम मेरा भी था, पहचान मेरी भी,जीवन मेरा
Read Moreजब रिश्तों की राहों में, सवाल कई उठते हैं,दिल की खामोशी में, कुछ जवाब छुपते हैं।साथ चलना अगर दोनों की
Read Moreलोकतंत्र अब रो रहा, देख बुरे हालात।संसद में चलने लगे, थप्पड़-घूँसे, लात॥ मर्यादा के नाम पर, होती केवल बात।शब्दों में
Read Moreअंधेरे की चादर ओढ़े, बरसों से सोया हुआ था गाँव,ना दीपक, ना उजियारा, जंगल, पगडंडी और ठांव। आज़ादी के 78
Read Moreआज देखा रस्सियों पर अगणितकपड़े लटके हुएयह किस-किस के है,पता नहीं?पर सूख रहे हैंकभी हवा का झोंका सूखा रही हैतो
Read Moreउम्र का यह दौर चौथा, हम तन्हा रह गये,रिश्तों को सँवारा नही, अब तन्हा रह गये।पंख मिले बच्चों को, निज
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