बचकर रहना कुटिल मुस्कानों से
नफ़रतों के इस अंधे दौर मेंयदि कोई मोहब्बत लुटा जाए,तो उसे सिर माथे बिठाइए,दुआओं में उम्र उसकी बढ़ा जाए। ये
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Read Moreयुद्ध की विभीषिका अबपड़ रही भारीतुम्हारे लिए। क्या फायदा मिलेगा बताओबम-बारुद फोड़करतुम्हारे लिए। जरुरी अब विचार करनायुद्ध का अत्याचारतुम्हारे लिए।
Read Moreघर अब भी जाता हूँ,वही आँगन, वही दरवाज़ा—बस फ़र्क इतना है,अब कोई मेरा इंतज़ार नहीं करता। रसोई से खुशबू तो
Read Moreअपनी गलती और भगवान,दोनों मानो तो ही दिखाई देंगे।जो सिर झुकता है सच के आगे,उसी को रास्ते सुझाई देंगे। हम
Read Moreये कैसी जद्दोजहद से भरी है जिंदगी!किसी को सारे आकाश की मिली है खुशी,तो कोई मुट्ठी भर खुशी के लिए
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