व्यंग्य – न्यूज बनाम न्यूज
आजकल के न्यूज चैनल खोलते ही समाचार नही बल्कि चटखारे मसाले सुनने को मिलता हैं, भारतीय मनुष्य के जीवन में
Read Moreआजकल के न्यूज चैनल खोलते ही समाचार नही बल्कि चटखारे मसाले सुनने को मिलता हैं, भारतीय मनुष्य के जीवन में
Read Moreवे बीच चौराहे पर खड़े होकर हाथ फेंक-फेंककर चीख रहे थे- ”सरेंडर कर दिया! सरेंडर कर दिया!!“मैंने किसी तरह उनको
Read Moreबचपन में हमें प्राथमिक कक्षाओं से ही फूल बनाने की कला में पारंगत करने की कला का अभ्यास कराया जाता
Read Moreबहुत दुःख की बात है यारो कि बारबाला को आज बहुत रोना आ रहा है। बेचारी दहाड़ें मार-मारकर छाती पीट-पीटकर
Read Moreलोगों को बहुत जल्दीबाजी है। सब लोग लबर- लबर करने में लगे हैं। न्यूज और व्यूज पाने की। अपडेशन की
Read Moreएक बाबा जी के विचार सुनने को मिले। सचमुच उनको सुनकर दिल गदगद हो गया। वो आदमी और आदमी में
Read Moreदीवाली पर जैसी व्यापारी की तैयारी होती है वैसी ही होली पर व्यंग्यकार की तैयारी होती है। होली व्यंग्य वालों
Read Moreविचारणीय प्रश्न यह है कि उल्लू सदैव टेढ़ा ही क्यों होता है,जिसे सीधा करने की आवश्यकता पड़ जाती है ?
Read Moreसबका साथ सबका विकास! बटोगे तो कटोगे! एक रहो सेफ रहो! जैसे जुमलों के बीच एक नये लल्ला का जन्म
Read Moreबहुत समय हुआ जब से वे लोगों को प्रणाम करना भूल गए हैं। इसके पहले वे बहुत व्यहवारिक थे। हमेशा
Read More