वह सुबह से शाम करती है
मैंने उसको देखानदी के रेत परवह रेत ढोती हैसुबह से शाम तकबिखरे बालों मेंचेहरे पर एक बेवसी हैएक सादगी भी
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Read Moreविधा- कविताशीर्षक- सावन के त्यौहार आया श्रावण मास, लाया खुशियों का विश्वास,भगवान शिव की आराधना, प्रभु-मिलन की आस। बरसेंगे गगन
Read Moreपरिवार ने स्नेह दिया,तो मित्रों ने हौसला बढ़ाया,शिक्षक ने ज्ञान का दीप जलाकर,जीवन-पथ समझाया।समाज ने अपने अनुभवों से,कितने सबक सिखाए,बुजुर्गों
Read Moreआखिरी दोस्तआखिरी उम्मीद हो तुम।जीवन के अंतिम अध्याय कीअंतिम कड़ी हो तुम।मोह का पाश नहींस्नेह का अंतिम चरण हो तुम।मेरे
Read Moreबहन ही होती हैभाई की बुराई कभी नहीं करतीऔर न सुन सकती हैअपमान भरे शब्दअभावग्रस्त भाई सेकुछ आशा भी नहीं
Read Moreसतगुरु भाणे में शिष्य का हित छिपा होता है,हर हुक्म में प्रेम का अमृत घुला होता है।जो सिर झुकाकर गुरु
Read More१) सूर्य के उदय होते हीहै हो जाता तम का सम्पूर्ण शमनरवि के बिना नही जीवन । २) कितना भी
Read Moreपर्वत से सैलाब अब, बहा रहा सब साथ।कुदरत के इस क्रोध से, काँप उठा हर हाथ।। पल में उजड़े आशियाँ,
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