कुदरत का हिसाब
नदियों के जो पथ दबा, करते रहे विकास।बाढ़ बनी जब काल फिर, किसका बचा निवास।। काटा पेड़ों को सदा, पर्वत
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Read Moreअंधेरे रास्तों पर जब भरम का जाल होता है,वहां चेतना का हर एक सवाल बेहाल होता है,दुआओं के भरोसे जो
Read Moreजो असहाय हैंजो अभावों में हैंकिसी की जरूरतों मेंकभी काम न आ सकेफिर भी मदद का हौंसला रहापर कर न
Read Moreचिट्ठी लाई गाँव से, जब राखी उपहार।आँसू छलके आँख से, देख बहन का प्यार।। रेशम की डोरी सजी, लेकर नेह
Read Moreआ गए मोहन ह्रदय में अब निकल पाना कठिन हैभव से तर जाना सरल है-1.सौप दी जब डोर जीवन की
Read Moreयूँ ही अचानक एकाकीपन में,आज फिर उपस्थिति हुई तुम्हारी,सहरा में जैसे सुमन खिल गया हो,खुशी से आंखें हो गईं नम
Read Moreशिव जी बसे हैं मेरे दिल में, उनकी महिमा न्यारीअवघड़दानी शिव बाबा को, पूजे दुनिया सारी-कहलाते कैलाशी, शिव जी हैं
Read More१) हे मां शारदेअज्ञान का तिमिरशीघ्र मिटाओ । २) भागा रे तमउगते ही सूर्य केदुम दबा के। ३) रखिये सब्रथोड़ी
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