दुनिया कितनी नीच
दूजे के घर आग में, सेंके अपने हाथ।याद रखो वह आग फिर, ढूँढे तेरा साथ।। दूजे के दुख पर हँसे,
Read Moreदूजे के घर आग में, सेंके अपने हाथ।याद रखो वह आग फिर, ढूँढे तेरा साथ।। दूजे के दुख पर हँसे,
Read Moreदूजे को बदनाम कर, ढूँढे अपना मान।कीचड़ उछले तो बचे, तेरा कहाँ गुमान।। आज बुझे इस दीप पर, तुम हँसते
Read Moreएक ढलती संध्या, दर्पण किया साफ़,उसने कहा, “देर से ही सही, आ गई पास।आई हो अब, जब घिर आई है
Read Moreराखी का ये पर्व है, प्रेम भरा त्योहार।भाई-बहन के स्नेह से, महके सारा संसार॥ जिनके भाई हैं नहीं, बहनें हों
Read Moreमेरे इन प्यासी पलकों परख्वाब सुनहरे किसके हैं?क्या वही हैं, जिनकी ख़ातिरहम रात-रात भर सिसके हैं? एक क्षण कभी ऐसा
Read Moreएक बुढ़ी माँदेर रात तकसब्जी का एक टोकरा लिएमोहल्ले के बीचकाफी देर तक बैठी रहीगांव से लायी थीकरेमुआ सब्जीहरी-हरी पत्तों
Read Moreअब बता भी दे जरा,और क्या चाहती है तू मुझसे,तंग आ चुका हूं तुझसे,विवाहोपरांत मेरी पत्नी,क्लोज नहीं हो पायी उतनी,उतना
Read Moreतन के आकर्षण से चला, मन का पहला ज्ञान।मोह-जाल में उलझता, भटका मेरा ध्यान॥ रूप-सौंदर्य की चाह में, बीता जीवन-काल।इच्छाओं
Read Moreनन्हे हाथों में सजे,सपनों के संसार।कंप्यूटर से सीखता,बच्चा नया विचार॥ देखे चित्रों में छिपे,ज्ञान भरे उपहार।खेल-खेल में सीखता,जीवन का व्यवहार॥
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