ग़ज़ल
दौलत से उसे प्यार नहीं है तो नहीं हैंहर शख़्स गुनहगार नहीं है तो नहीं हैं आरोप लगाकर हैं बड़े
Read Moreनील गगन की विमल छटा है।नहीं तनिक भी कहीं घटा है।। चैत्र मास मधु बाँटे प्रतिदिन,अलि गुंजन से बाग पटा
Read Moreवों बूढ़ी किताबें थम गईं, मन चंचल हो उड़ चला,शब्दों का सागर सूख गया , हर अक्षर जैसे मुड़ चला।
Read Moreयकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है,अंधियारे पथ में भी दीपक संभलता है। झंझाओं की गोद में काँपती लौ सही,पर
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