ग़ज़ल
वक़्त चलता ही रहा चाल, हमारा क्या हैकिसने पूछा है कभी हाल हमारा क्या है कैसे गुज़री है इधर और
Read Moreश्रम से नहीं उबरती माँ।हर पल उद्यम करती माँ।। निज संतति की ईश्वर जो,नहीं किसी से डरती माँ। पुत्री-पुत्र प्रसविनी
Read Moreहमको ये मंज़ूर नहीं है।क्योंकि वो मजबूर नहीं है। मत गाओ राग अधूरा,इसमें लय भरपूर नहीं है। नफ़रत की दीवार
Read Moreबदलते बक्त में मुझको दिखे बदले हुए चेहरेमाँ का एक सा चेहरा , मेरे मन में पसर जाता नहीं देखा
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