प्यासी धरती तपस्विनी सी ताक रही है अंबर को
प्यासी धरती तपस्विनी सी ताक रही है अम्बर को।थोड़ा जल बरसा दे रे मेघा, रोक दे ऐसे मंजर को। जगह-जगह
Read Moreप्यासी धरती तपस्विनी सी ताक रही है अम्बर को।थोड़ा जल बरसा दे रे मेघा, रोक दे ऐसे मंजर को। जगह-जगह
Read Moreखुद पर हँसना सीख लिया है,हाँ, हमने जीना सीख लिया है।रोने से क्या हासिल होता,हमने गम में सीख लिया है।
Read Moreआओ! मिलकर रंग लगाएँ, प्रेम – सुधा बरसाएँ।सोल्लास शुचि परम्परा से, होली पर्व मनाएँ। नवसस्येष्टि यज्ञ करें हम, बाँटें दिव्य
Read Moreपुलवामा के अमर शहीदो, हम सब करते तुम्हें नमन।भारत माँ के वीर सपूतो, रहे तुम्हीं से शांति अमन॥ खोया है
Read Moreडॉट पैन तब न थी नोटबुककिटकंनों की पगडंडी। एक हाथ में तख्ती लटकीकंधे पर बस झोलानाम मात्र की तीन किताबेंचंचल
Read Moreप्रकृति ने किया श्रृंगार आई फाल्गुनी बहार है,जीवन में खिले फिर इंद्रधनुषी रंग बेशुमार है । मुस्कुराने लगी है कलियॉं
Read Moreतोता रो-रोकर सुनाए, मूक पखेरू की कहानी,आँखों से आँसू बहते, कहता दुख की जुबानी। मेरी गौरैया अब देखो, कहीं नहीं
Read Moreकदाचित् मैं सृष्टा की कली हूँ,खिली खिलखिलाई ख़ुशबू दी हूँ;भ्रमरों को प्राणें का पराग दी हूँ,कालांतर में धरा धूल से
Read Moreभोर किरण है आशा की यह, मन में जोत जगाती हैं।गीत लिए यह नव जीवन का, मधुर हृदय में गाती
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