वाक्-सिद्ध
रात -रात भर परखा तेराभौं -भौं का भौकाल। बहुत गलत है कुत्सा कहनाकुत्ता भी अपमानवाक़्-सिद्धि पाई है तुमनेतुम मानव की
Read Moreरात -रात भर परखा तेराभौं -भौं का भौकाल। बहुत गलत है कुत्सा कहनाकुत्ता भी अपमानवाक़्-सिद्धि पाई है तुमनेतुम मानव की
Read Moreझूठी-साज़िश गढ़ रहे, , फैलाएँ भ्रम-जाल।सजग रहे जन-गण सभी, विफल करें हर चाल॥ सदा देश की एकता, इनको अखरे पार्थ।भेदभाव
Read Moreमंझधार में घिरी नौका को तूफाँ से बचाने वाला हूंमेरा छोटा सा परिचय है मैं अग्नि कुंड की ज्वाला हूं
Read Moreबाल, किशोर, युवा, वृद्ध, सबको भाए सबको प्यारी। साईकिल की करो सवारी, इसकी शान है सबसे न्यारी।। पर्यावरण के लिए
Read Moreचलो प्रकृति से नजदीकियां बढ़ाएंएक हाथ निःस्वार्थ दोस्ती का बढ़ाएंबनावटी पन सब दूर हो जाएगाजीवन का मर्म समझ में आएगा
Read Moreव्यूज़ बटोरन को रचें, रोज़ नए संग्राम।घर-आँगन तक बेचते, यूट्यूबर कुछ नाम।। व्यूज़ की इस दौड़ में, कैसा आया दौर,सच
Read Moreसेपेड़ लगाना ही नहीं, रखना भी है ध्यान।जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।। पाँच जून के दिन सभी, लें
Read Moreकोयल जब भी बोलती, मचता बड़ा बवाल।झूठे शोरों को लगे, जैसे कुछ जंजाल।। सच की मीठी बात से, क्यों इतना
Read Moreशिक्षा थी संस्कार की, ज्ञान-ज्योति का धाम।अब बाजारों में बिके, उसका पावन नाम।। विद्यालय के द्वार से, घटता अब विश्वास।कोचिंग
Read More