पद्य साहित्य

हाइकु/सेदोका

जाते ही श्मशान में मिट गई दूरियां

जीवन भर कीमन की कड़वाहटें,साथ चलीं। अहम के पर्वत,ऊँचे थे बहुत,ढह गए सब। रिश्तों के बीचजो दीवारें थीं,राख हुईं। मौन

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