सिनेमा, संस्कृति और हाशिए पर जाते त्योहार
सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है। यह समाज का आईना, संस्कृति का कथाकार और बदलते सामाजिक मूल्यों का एक
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Read Moreधर्म मनुष्य के जीवन में केवल पूजा-पद्धति या कर्मकांड का विषय नहीं है। वह उसकी आस्था, संस्कृति, नैतिकता, परंपरा और
Read Moreअभिव्यक्ति मन की‘तुलसी’ सब छल छाँड़िकै,कीजै राम-सनेह।अंतर पति सों है कहा, जिन देखी सब देह॥ मनुष्य को सारे छल-कपट छोड़कर
Read Moreदेव भूमि उत्तराखंड में पंच बद्री, पंच केदार, पंच प्रयाग प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है इनके दर्शन करने से आध्यात्मिक शांति
Read Moreहमारे देश के राष्ट्रीय पर्व का अलग ही महत्व है,क्योंकि इसमें हमारे देश के जाबांज स्वतंत्रता सेनानियों का तन-मन धन
Read Moreवर्षा की फुहारों से नहायी धरती, हरियाली की चादर ओढ़े पहाड़ियाँ, कल-कल बहते नदी-नाले, पेड़-पौधों पर पसरी नवजीवन की आभा
Read Moreहमारी प्राचीन परंपराएं मात्र रीति-रिवाजों या कर्मकांडों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि वे अस्तित्व के विज्ञान और ब्रह्मांडीय संतुलन के
Read Moreअक्सर लोग कहते रहते हैं- “अरे भाई घोर कलियुग है”। जहाँ कहीं कोई अनियमितता देखी रोने लगते हैं- “कलियुग में
Read Moreमनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में रहते हुए उसका अन्य व्यक्तियों से निरंतर संपर्क होता है और इस संपर्क
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