दो गीत
1- विरह की हवा चली है घर आ जाओ न।।देखो सिंदूरी शाम ढली है घर आ जाओ न। दिल के
Read Moreरखना जीवन में सदा, यही आत्म सम्मान।दृढ़ निश्चय विश्वास से, ऊंची रहे उड़ान। छू लेना आकाश को, कर सपने साकार।हिम्मत
Read Moreधूप क्यों शरमा रही हैआ गया है मीत अगहन। भोर अँगड़ाई लिएअब उठ गई हैएक पिड़कुलियाभजन गाती उठी हैदाल अरहर
Read Moreजीवन में है संघर्ष सघनफिर भी जिन्दा हूँ मस्त मगनचाहें जीवन की ज्योति बुझे, संकल्प त्यागूँगा नहींमैं हार मानूंगा नहीं!!1!!
Read Moreहर रोज़ तेरा,तेरी खुद की परछाई से यूं जूझना ।रूदन भरीआवाज़ मेंआक्रोश से तेरा छटपटाना।। देख कर मुझे तेरे इस
Read Moreसच से भय लगता है जिसको जिसने चाहा लूट लिया है। हमने सब स्वीकार किया है। खट्टे मीठे अनुभव अपने,
Read Moreपाप पुण्य की क्या परिभाषा कहीं हताशा कहीं निराशानदी मिलेगी तय सागर में पानी में घुल रहा बताशा हाथों में
Read Moreना झाड़ो इतना घर को तुम, कि सब निशान मिटा डालो,कुछ धूल जमी रहने दो, यारो, यादों को फिर जगा
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