एक दीप जलाएँ
आँधियारों से लड़करएक दीप जलाना हैमिलजुल कर दीवाली पर्व मनाना है।नफरत के इस दौर में,प्यार का पुष्प खिलाना हैहर घर-आँगन
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Read Moreघर के आंगन में है एक हरड़ का पेड़बड़ी बड़ी हरड़े लगती हैं बहुत दूरकई वर्षों से खड़ा एक कोने
Read Moreसत्ता के जो गलियारे हैं,वहां संवेदना सोती है,कुर्सी के भूखे हाकिम को,कब जनता की पीड़ा होती है?तुम न्याय मांगने जाते
Read Moreएक युवती आत्महत्या के लिएपुल से कूदना चाहती हैअंत करना चाहती हैखौफनाक दृश्यकोई नहीं रोकना चाहता हैबेचारी कोघर के ताने
Read Moreभूल हुई तो मान लो, मत करना इनकार।सुधर गया जो वक्त पर, उसका जीवन सार॥ गलती से जो सीख ले,
Read Moreअबला कहकर मत दबो, नारी है तलवार।हक़ की खातिर उठ खड़ी, करती सीधा वार॥ आँसू कमजोरी समझ, मत करना व्यवहार।बूँद-बूँद
Read Moreमाँ के बिना घर की हर दीवार बिखर जाती है,पापा के बिना तो पूरी दुनिययाँ ही उजड़ जाती है।माँ की
Read Moreपेट की ये आग करा लेती है करतब कितने-कितने! देखने वाले अंगुलियाँ दबा लें दाँतों के तलेहै नहीं कोई घर
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