बाड़ खेत को खा रही
जनता के अधिकार पर, भारी सत्ता-तंत्र।कहने को तो देश में, है आज लोकतंत्र।। कुर्सी की खातिर यहाँ, रिश्ते हुए तमाम।नीति
Read Moreजनता के अधिकार पर, भारी सत्ता-तंत्र।कहने को तो देश में, है आज लोकतंत्र।। कुर्सी की खातिर यहाँ, रिश्ते हुए तमाम।नीति
Read Moreतुम हर वक़्तसबके अंदर झांकते होढूंढते होकुछ बुराइयाँढेर सारी कमियाँयह अच्छी बात हैकभी अपने अंदर पल रहेकुछ ईर्ष्याकुछ खुरापातइनको भी
Read Moreसमय बदलता जा रहा, बदल रहा संसार।जो चलता बदलाव सँग, करता नैया पार॥ बदलावों से डर भला, कब तक मन
Read More२५ साल बाद ९/११ की घटना कोफिर से दोहराने की हुई चेष्टाकैप्टन माछर ने दिखाई जिंदादिलीसह-पायलट रह गया सिर्फ देखता।
Read Moreतर्क-ए-तअल्लुक़ भी नहीं करता, मेरा होता भी नहीं।ये कैसी मोहब्बत है कि सुकून दिल को मिलता भी नहीं। ये दर्दे-मोहब्बत
Read Moreहम तुम जब हैं साथ साथ तो,लोगों से क्या डरना है।राह सत्य की चलते रहना, काम सही जो करना है।
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