पिता को श्रद्धांजलि
एक बरस बीत गया तुम्हें गए,पर मैंने तुम्हें याद नहीं किया-क्योंकि मन की स्मृतियों मेंमैंने तुम्हें विदा… है नहीं किया।
Read Moreएक बरस बीत गया तुम्हें गए,पर मैंने तुम्हें याद नहीं किया-क्योंकि मन की स्मृतियों मेंमैंने तुम्हें विदा… है नहीं किया।
Read Moreहरमन, तुमने क्यों छोड़ी कमान,आज यह पूछ रहा है हिंदुस्तान।जीत की राहों की ‘तुम: सरताज,तुमसे रोशन हुआ देश का मान।
Read Moreनन्हे हाथों में लिए, क्रीम भरा कटोर।चेहरे पर मुस्कान है, मन में मस्ती जोर।। गालों पर क्रीम लगा, बैठा नन्हा
Read Moreजनता के अधिकार पर, मंडराता अंधकार।मत की चोरी रोकना, लोकतंत्र का सार।। आरोपों के दौर में, उठते कई सवाल।सच क्या
Read Moreकी थी एक दिन नई शुरुआत,कुछ टूटे-फूटे शब्दों के साथ,भावों का समंदर उफन रहा था,मन कुछ लिखने को कह रहा
Read Moreहर अपना अपना नहीं, भ्रम में रहना छोड़ ।समय पड़े तो देखिए, कौन निभाता जोड़ ।। रावण को विश्वास था,
Read Moreउनका मशक्कत तो सिर्फ चुनावी समय में होता है,जो जीत गए हंसे पांच सालजनता तो रोने के लिए है इसलिएपूरे
Read Moreहाँ, वह चंदेलों की बेटी थी, गोंडों की बनी थी बहू,माटी की आन बचाने गई, रण की धधकती धू-धू।जन्म मिला
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