हिंदी, भावों की सहज अभिव्यक्ति
विधा- कविताशीर्षक- हिंदी, भावों की सहज अभिव्यक्ति हिंदी हमारी आन-बान शान-पहचान हैभावों की सहज अभिव्यक्ति इसकी जान है,सहज अभिव्यक्ति से
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Read Moreविधा- कविताशीर्षक- हिंदी खुद अपनी पहचान शब्द-शब्द में हिंदी भाषा,कण-कण में है हिंदुस्तान,हिंदी है तो हम जीवंत हैं,हिंदी खुद अपनी
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- तेरी परछाईं! मेरे साथ चलती है मेरी परछाईं,लगता है साथ मेरे तू चलती आई,आज क्यों दूर-सी खिसक रही
Read Moreमिट्टी ने कभी नहीं पूछा—“मुझे क्या बनना है?”बस किसी शिल्पी के हाथों मेंख़ुद को सौंप दिया। हर चोट जो उस
Read Moreएक और आज़ादी चाहिएसरहदों की जंग तो जीत ली हमने,मगर घर में ये कैसा कोहराम है?जिस आज़ादी के लिए बहे
Read Moreकाम नहीं, बस एक्ट है, आरोपों की रेट।एटीएमों-सा खुला, बन बैठा पैकेट।। काम नहीं, बस शोर है, धारा बनती ढाल।निर्दोषों
Read Moreमैंने उसको देखाएक गंभीर चेहरे के साथउदासी भरपूर थीतीस वर्षीय एक युवती कोयौवन से परिपूर्णलहराते बालगौर वर्ण से सुसज्जित थीहाथों
Read Moreकंठ रुँधा है नयनद्वय, बहा रहे हैं नीर।मन के भीतर दर्द है, कौन समझता पीर॥ आँखों में सावन बसा, अधरों
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