दो कौड़ी के लोग
रील-शोहरत का लगा, अब तो ऐसा रोग।लाज-शरम सब बेचते, वाह-वाह के लोग।। लाइक-शेयर की भूख में, बेच रहे संस्कार,प्रसिद्धि की
Read Moreरील-शोहरत का लगा, अब तो ऐसा रोग।लाज-शरम सब बेचते, वाह-वाह के लोग।। लाइक-शेयर की भूख में, बेच रहे संस्कार,प्रसिद्धि की
Read Moreनहीं चाह अब रही हमारी, चाह रहे बस खुशी तुम्हारी। जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।।
Read Moreव्याकुल मन को बॅंधाते धैर्य सावन की फरियाद लिए,जून तुम आए हो आशाओं का नव “आनंद” राग लिए । बीतेगी
Read Moreलोभ मोह में उलझा मानव, बनी हुई है पीर।कैसे कोई समझाए इनको, व्यर्थ बहाते नीर।। इस दुनिया की गजब कहानी,
Read Moreसीखो वृक्षों से अपनापन, जीवन मधुरिम हो मनभावन।।मुस्काते सबके घर आँगन, लगते सबको बड़े सुहावन।। तन मन में हैं स्फूर्ति
Read Moreसोच यही बस सब्र कर, मत कर मन संताप।सबको सब कुछ ना मिला, यही जगत का जाप।। अपनी-अपनी किस्मतें, अपने-अपने
Read Moreभक्ति की आँधी चली, डोला फिर इंसाफ।जेलों से भी लौटकर, मिलता वैभव-लाभ।। कल जिन पर आरोप थे, गूँजा था दरबार,आज
Read Moreपेट्रोलों के बढ़ गए, देखो फिर अब भाव।महँगाई की मार से, डगमग सबकी नाव।। ट्रैक्टर, बस, ट्रक सभी, माँग रहे
Read Moreरील-शोहरत का लगा, अब तो ऐसा रोग।लाज-शरम सब बेचते, वाह-वाह के लोग।। लाइक-शेयर की भूख में, बेच रहे संस्कार,प्रसिद्धि की
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