घड़ी मिलन की आने को है
विधा- कविताशीर्षक- घड़ी मिलन की आने को है चलती रेल की खिड़की,क्या-क्या दिखाती है,हर पेड़ पीछे छूट रहा,हर पत्ती झूमती
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Read Moreविधा- कविताशीर्षक- साथ तेरा जो पाया जन्म-जन्म की तृष्णा मिट गई,साथ तेरा जो पाया,तेरी मृदु मुस्कान से ही मेरा,तन-मन है
Read Moreशिक्षक बोले-“बारिश” का बहाना है, ज़रा देर लगेगी,प्राचार्य कहे-ये ई अटेंडेंस का जमाना एब्सेंट लगेगी। छाता लेकर निकले गुरुजी, राहों
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- हरियाली की बहार सावन हो-न-हो मेरे घर हर पल सावन है,हरियाली की बहार है,हरियाली का गलीचा, हरियाली की
Read Moreहाथों में सज चूड़ियॉं, करती मधु झंकार।खन-खन-खन की ताल से, करे प्रेम संचार।। ये हरी-भरी चूड़ियॉं, सजनी का श्रृंगार।सजना लाए
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- निस्बत किससे! निस्बत न बना ऐसे लोगों से,जो बस स्वार्थ के लिए,सामने मीठा-मीठा बोलते हैं,पीठ पीछे छुरा भोंकते
Read Moreबरखा की पड़त फुहारनाचो सखी गाओ मल्हार ।। सावन वर आयो,प्रकृति वधू सज गई ।आई बारात मेरे द्वार ।नाचो सखी
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- मृदु मुस्कान जाने कैसे बदल गया इतिहास,खत्म हो रही रिश्तों की मिठास,बदल गए अपने ही वे अब तो,जिनसे
Read Moreछिपे, पहने कई लिबास।बात-बात पर देश का, करते हैं उपहास॥ राष्ट्रहितों को भूलकर, करते अपना काम।शब्दों से विष घोलते, करें
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