धरती माँ की पुकार
धरती माँ आज बहुत उदास है,सूनी उसकी हर एक साँस है।कहीं कटते वन, कहीं सूखी धार,सुनो मनुष्य! उसकी करुण पुकार।
Read Moreधरती माँ आज बहुत उदास है,सूनी उसकी हर एक साँस है।कहीं कटते वन, कहीं सूखी धार,सुनो मनुष्य! उसकी करुण पुकार।
Read Moreएहसासों से लिखे जाते हैं जहाँ रिश्ते,शब्दों के मोहताज नहीं होते जहाँ रिश्ते,चारों तरफ से प्यार होता है “परिवार”,स्नेह की
Read Moreकर्मों का बोझ जब दिल को सताता है,हर रास्ता धुंधला-सा नज़र आता है,सतगुरु की रहमत जब सिर पर बरसती है,भारी
Read Moreज़िंदगी किराए का मकान है,ठहरना बस कुछ पल है,आज अपना लगता है जो,कल वही सफ़र है।न मोह को इतना पालो
Read Moreसावन की रिमझिम फुहारों में, धरा हरियाली ओढ़े,खेतों की मेड़ों पर जैसे, कोई सपना चुपके से दौड़े।नागपंचमी पावन बेला, भोजली
Read Moreथोड़ा देकर ज्यादा छीन लेते हो,कम रहता है उसे बहुत गिन देते हो,संवैधानिक हक़ को अहसान बताते हो,गाहे-बगाहे इसे हर
Read Moreमेरे पास फोन आया“भैया, कोई काम दिलवा दो… बहुत परेशान हूँ।”मैंने पूछा “भाई, आपकी डिग्री क्या है?”वह बोला “भैया… सिर्फ
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