दीवारों के कान होते हैं
सुना था, दीवारों के कान होते हैं,मगर अब तो दीवारें ही नहीं हैं।दीवारें नहीं हैं शर्म की,दीवारें नहीं हैं अब
Read Moreसुना था, दीवारों के कान होते हैं,मगर अब तो दीवारें ही नहीं हैं।दीवारें नहीं हैं शर्म की,दीवारें नहीं हैं अब
Read Moreजीवन में योग को अपनाइए, रोगों को दूर भगाइए,चेहरे की स्वर्णिम कांति संग जीवन “आनंद” बढ़ाइए ।चंचल मन को समझाइए,
Read Moreशब्द कभी केवल शब्द नहीं होते,वे समय के दस्तावेज होते हैं,जो लिखे जाते हैंसदियों की चुप्पियों के बीच,और पढ़े जाते
Read Moreजीवन का भी अजीब खेला है,बस दो दिनों का मेला है।सब माया मोह का जाल है,सबका भ्रम में जीने से
Read Moreबाल श्रम निषेध दिवस मनाएँ या न मनाएँ पर यदि कल सँवारना है तो आज बच्चों का बचपन
Read Moreचुनाव का मौसम आया, गलियों में शोर उठा,हर दीवार पर चेहरा नया, हर वादा फिर से सजा।भाषणों की बारिश में,
Read More