कुण्डलिनी छंद
आई है जब आपदा, भरते हैं सब आह।मानें ईश्वर दंड है, बस्ती हुई तबाह।।बस्ती हुई तबाह, आज तो हम सब
Read Moreआई है जब आपदा, भरते हैं सब आह।मानें ईश्वर दंड है, बस्ती हुई तबाह।।बस्ती हुई तबाह, आज तो हम सब
Read Moreदेना किसको दोष है, पहले जाओ भूल।पहले इसको झेल लो, चुभा हुआ जो शूल।।चुभा हुआ जो शूल, बैठ
Read Moreवो दिन भी कितने अजीब थेजब हम तेरे करीब थे ।ना किसी को पाने की जिद थीना किसी को खोने
Read Moreमक्खी बैठी हो दीवारों पे, या भिनभिनाए कानों में,क्या हथौड़ा लेकर दौड़ेंगे, हम अपने ही मकानों में?रोकना तो राहों को
Read Moreआसान नहीं नास्तिक होना,भीड़ से अलग राह पर चलना,अंधेरे में दीया बनकर जलना,न ईश्वर का खौफ,न अल्लाह का डर,न जिन्न
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