नारी नर पर भारी है
नारी नर पर भारी है,फिर भी वह बेचारी है। आँसू का हथियार चलाती,सबको अपना दास बनाती,पलभर में घुटनों पर लाती,फिर
Read Moreनारी नर पर भारी है,फिर भी वह बेचारी है। आँसू का हथियार चलाती,सबको अपना दास बनाती,पलभर में घुटनों पर लाती,फिर
Read Moreफीकी हँसी मुख लिए, भीतर गहरा शोक।हँसते-हँसते जी रहे, मन को कितना रोक॥ पगडंडी की छाँव थी, सड़कों का विस्तार।सुविधाओं
Read Moreसारे दुःख जो सह गया, बनकर दृढ़ इंसान।पर अपनों की बेरुख़ी, ले बैठी मुस्कान॥ जीवन भर जो बाँटता, सबको अपना
Read Moreयूं ही नही दिल से दिल मिलते हैंअच्छे मित्र मुश्किल से मिलते हैं। बड़ी-बड़ी बातें तो बहुत करतेलेकिन बात का
Read Moreधन आया घर-द्वार पर, बदले सब व्यवहार।नए अमीरी रंग में, छूट गए संस्कार॥ अपनापन जब से गया, भूले अपने लोग।अहंकार
Read Moreबीज का स्वप्न ले प्रारब्ध को, फूटे महि के बीच।स्वर्णिम मन में ख्वाब लिए तब, लेता आंखें मीच।नया परिवेश कैसा
Read Moreदृष्टि बदलते ही खुला, जीवन का विस्तार।मन ही बाँधे देह को, मन ही दे उद्धार॥ तारे दूर नहीं कभी, दूरी
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