लिख दी अपनी जीत
काँटे जितने बढ़ गए, उतना बढ़ा जुनून।मंजिल चाहे दूर थी, मन में रहा सुकून।। ठोकर देकर सोचते, अब टूटेगा आज।गिरकर
Read Moreकाँटे जितने बढ़ गए, उतना बढ़ा जुनून।मंजिल चाहे दूर थी, मन में रहा सुकून।। ठोकर देकर सोचते, अब टूटेगा आज।गिरकर
Read Moreमाँ को कुर्सी दे दो, इतना तो “सम्मान” रहे,उम्र की ढलती शाम, चेहरे पर मुस्कान रहे।राजनीति अपने स्थान, मतभेदों में
Read Moreदलित, पिछड़े और सवर्णहम सबको पास बुलाते हैं,हैं सभी नागरिक इस देश के,सबको गले लगाते हैं,इंसानियत ही धर्म है अपना,पीड़ा
Read Moreफिर से उठने लग गए, बाबर वाले पाँव।औरँगजेबी सोच से, सहमा सारा गाँव॥ नफरत लेकर घूमते, चेहरे बने महान।प्रेम-सद्भाव भूलकर,
Read Moreगलती अपनी मानना, लगता भारी पाप।शनि-मंगल पर डालकर, धोते अपने पाप।। कर्मों में जब छेद हों, ग्रह बन जाएँ ढाल।कुँडली
Read Moreनन्हे हाथों में छुपा, सपनों का संसार।मेहनत से ही खिल उठे, जीवन का हर द्वार।। सूरज रोज़ सिखा रहा, उठकर
Read Moreकिसको अपनी पीर कहें, हम सवर्ण हैं,दया दान धर्म पालन रीति, हम सवर्ण हैं।मेहनत कर आगे बढ़ते, नही ईर्ष्या भाव,फिर
Read Moreमधुर स्वरों से वाणी सजी हुई, वीणा के ज्यों बजते हो तारधुन मुरली सी कान्हा की, हर बात में छलक
Read Moreहमारी बेटियांसमाज की निगाहों सेअब भीअसुरक्षित महसूस करती हैंजब घर से निकलकरस्कूल, कालेजया बाजार जाती हैंगंदी निगाहेंघूरना चालू हो जाती
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