दोहा
शोक मना के कर दिया,पूरा अपना फर्ज।बच्चे जो जलकर मरे,चढ़ा गये हैं कर्ज।। कितनी सस्ती हो गई,अब बच्चों की जान।भृष्टाचारी
Read Moreजीवन की जंग लड़ता तन, पीड़ा से भरा हर श्वास,फिर भी सभी को चाहिए, लक्ष्यों का विकास। रिश्तों की थकान,
Read Moreपत्थर भी अपने चले, अपने ही थे हाथ।फिर कहते निर्दोष हैं, कैसी झूठी बात॥ आग लगाकर बस्तियाँ, करते ऊँची बात।आँसू
Read Moreहां मैं लिखता हूंसिर्फ लिखने के लिए नहींअपने जज्बातों केइज़हार के लिए भी हां मैं लिखता हूंहर अल्फ़ाज़ में तुमकोमगर
Read Moreधरती डोली एक पल, काँपे घर-दरबार।रोया सारा देश फिर, टूटा जन-आधार॥ मलबों में दबते रहे, कितने सपने-प्राण।भाषण देते रह गए,
Read Moreविश्वास की डोरी टूट गई, सपनों की दुनिया छूट गई,जिस हाथ में मेहन्दी सजनी थी, मृत्यु छाया लूट गई। जिसने
Read Moreशिक्षा बोली — मैं चरित्र हूँ, विवेक हूँ, प्रकाश हूँ,परीक्षा बोली — मैं अंक हूँ, रैंक हूँ, विशेष अधिकार हूँ।
Read Moreजो अटल है, अजर-अमर है,उसकी पीठ में घोंप रहे हो खंजर।अपनी निर्दयता के मद में चूर,कर रहे हो वनों को
Read Moreसबके मन में दर्द है, सबकी अपनी पीर।हँसते चेहरे ढाँपते, भीतर की तस्वीर॥ धूप मिली तो क्या हुआ, छाया भी
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