मुक्तक
मन से अपने काम क्रोध का आओ हम कण कण फूंके।कुदृष्टि जो डाले उसके जीवन का हर क्षण फूंके।मृग रूपी
Read Moreआज के रघु चंद्र मनु यदुवंश वाले,बन दुशासन गर्व से इठला रहे हैं। द्रौपदी की लाज अब कैसे बचेगी?पीड़िता- भाई
Read Moreसच लिखने से मत डरो, चाहे हो प्रतिकार।झूठ भले ही जीत ले, सच माने संसार॥ शब्दों में ताकत बड़ी, शब्दों
Read Moreपर्वतराज के आँगन में जब दिव्य प्रभा मुस्काई,सती ने गिरिराज-सुता बन पुनः धरा पर छवि पाई।वृषभवाहिनी, त्रिशूलधारिणी, कमल सुशोभित हाथ,माँ
Read Moreसांडों का अब सड़क पर, बढ़ता जाता राज।राहगीर सहमे हुए, कौन सुने आवाज॥ बाजारों में घूमते, लेकर भारी देह।कब किसको
Read Moreतमस के अंधेरों में, जब सत्य भी घबराता है,झूठ बड़े-बड़े मंचों से सच का पाठ पढ़ाता है।कभी कोई तमस फैलाता,
Read Moreजलते पुतले देखकर, खुश होता संसार।मन के रावण पल रहे, कौन करे संहार॥ पुतला जलकर राख है, मन में भरा
Read More