बारिश की छन-छन से डर के
शांत निशा का रूप सुहाना,चाँदनी बिखरी गाँव की ओर।कच्ची पगडंडी, बांस के झुरमुट,छप्पर पर है दीप की पोर।शीतल पवन मधुर
Read Moreशांत निशा का रूप सुहाना,चाँदनी बिखरी गाँव की ओर।कच्ची पगडंडी, बांस के झुरमुट,छप्पर पर है दीप की पोर।शीतल पवन मधुर
Read Moreप्रभु श्रीराम! सुनो पुकार, क्यों सहूँ मैं अग्नि की मार?हर साल मुझे जलाते हो, फिर अगले साल बुलाते हो!मैं रावण
Read Moreप्रशासन में बैठे कर्णधारों,वंचितों के हक़ की बातों पर खामोश क्यों हो?सिंहासन की अंधी गलियों में खोए हो,जनता के इस
Read Moreजिंदगी को सरलता से भीहम जी सकते हैंबिना तड़क-भड़क केसादगी में भी रह सकते हैंबिना अकड़ के भी लोगजिंदगी को
Read Moreलोगों का मुँह बंद कराने में,क्यों अपनी ऊर्जा गँवाते हो?कुछ बातें अनसुनी करके देखो,क्यों व्यर्थ दिल को दुखाते हो? हर
Read Moreनशीली नज़र उसकी मेरी जानिब,मैं मुस्कुराया था,एक हादसा था हुआ, लोगों इसमें तुम्हारा क्या है।उसको है मुहब्बत,मुझसे, मैं भी उससे
Read Moreदिनकर ने दे दिया सबेरा,उम्मीदों का नया बसेरा,दुकानों के तख्ते जो बंद थेवह एक एक कर खुलने लगे हैं,चाय की
Read Moreएक मेले की रौनकबड़ी-बड़ी दुकानों सेनहीं सजती हैमेले मेंगुब्बारेवाला न होखिलौनेवाला न आयेचाटवाला न आयेचूड़ीवाला न आयेझूले न आयेजलेबीवाला न
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