चौपाई छंद
सारा जग परिवार हमारा। अब कैसा चाहें विस्तारा।। धन वैभव जब काम न आये। निज परिवार साथ हो जाये।। ऊँच
Read Moreआज रात प्रभु श्रीराम जी अभी अपने शयनकक्ष में पहुँचे ही थे कि पीछे से यमराज भी पहुँच गए, उन्हें
Read Moreये हम कहां जा रहे है? संवेदनाहीन, भावशून्य, पिशाच वृत्ति से लिपट, मानव जीवन की अस्थियां ले, संस्कारों की धज्जियां
Read Moreमार्क, सच मानो, मैं तुमसे ज़रा भी इत्तेफाक नहीं रखता,सांख्यिकी ज्ञान, सफेद झूठ के परे, दर्ज हो नहीं सकता॥ जन्म
Read Moreकम में खुश रहिए, खुशी कम नहीं होगी,मन की यह दौलत कभी कम नहीं होगी।महलों की चमक से जीवन नहीं
Read Moreढलती शाम का सफ़रसांझ ढली है, सूरज लाल,पेड़ों के पीछे छुपा गुलाल।कच्ची सड़क पर उड़ती धूल,घर लौट रहे हैं सब
Read Moreमत कह मुझे सीधासाधा, भोला या मासूम,वक्त पड़े तो दिखा सकता हूँअपना अनदेखा रौद्र रूप। कर लो जितनी मनमानियाँ करनी
Read Moreमत दीजिए बार-बार झूठे बयान नेताजीअब तो करें सच की पहचान नेताजी दौरे से जब लौटते हो थके हारेव्हिस्की से
Read More14 अगस्त, 1947 को, भारत का हुआ विभाजन था।हो गए असंख्य लोग बेघर, क्रूरतापूर्ण विस्थापन था। कोटिक जन थे शरणार्थी
Read Moreधैर्य धरो विपदा घड़ी, रखो हृदय में आस।पतझड़ के ही बाद तो, आता है मधुमास॥ घोर अँधेरा देखकर, होना नहीं
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