विभाजन विभीषिका की स्मृति में
14 अगस्त, 1947 को, भारत का हुआ विभाजन था।हो गए असंख्य लोग बेघर, क्रूरतापूर्ण विस्थापन था। कोटिक जन थे शरणार्थी
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Read Moreधैर्य धरो विपदा घड़ी, रखो हृदय में आस।पतझड़ के ही बाद तो, आता है मधुमास॥ घोर अँधेरा देखकर, होना नहीं
Read Moreएक घुटी-सी चीख है, सरयू तट की बात।बिन अपराधी श्रवण को, मार गया सम्राट॥राजमुकुट के तीर ने, कैसा किया प्रहार।बिन
Read Moreजलते हैं हमसे, देख हमें चहकते। लोगों की फितरत, खुशी देख बिगडते।। मुस्कुराते जब हम, क्यों जलता हैं जिया। परम
Read Moreहर मनुष्य का अपना मन होता है उसी दिशा में वह चलता है जो कुछ वह बोलता है, जो कुछ
Read Moreमानवीय संवेदनाएँ शून्य हो गई हैं,कुछ लोग सबकी ज़िंदगी से खेल रहे हैं।क्या पैसा इतना ज़रूरी हो गया है,कि इंसानियत
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