हास्य-व्यंग्य – यमराज ने हत्यारों की भर्ती की
यमराज जी बढ़ती जनसंख्या के कारण लोगों का मारने का काम पूरा नहीं कर पा रहे थे। उनके यहाँ कई
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Read Moreरोया आकाश,भीगी स्मृतियों में,चुप है पथ। सूनी चौखट,कदमों की आहट,ढूँढ़े मन। बुझते दीपक,धुएँ की लकीरों में,चेहरा खोया। टूटी प्रतिध्वनि,वक्त के
Read Moreजप, तप, नाम, व्रत, परमार्थसब बेकार से लगते हैं।झूठ, कपट, आँसू, द्वेष, कामसब साकार से लगते हैं।जब जीवन के झंझावातचरमोत्कर्ष
Read Moreसुना था, दीवारों के कान होते हैं,मगर अब तो दीवारें ही नहीं हैं।दीवारें नहीं हैं शर्म की,दीवारें नहीं हैं अब
Read Moreमानव सभ्यता के इतिहास में कुछ ऐसी परंपराएँ होती हैं जो समय, भूगोल और संस्कृति की सीमाओं को पार कर
Read Moreइंसानी समाज का यह एक बड़ा अलमिया है, ट्रैजिडी है कि हर इंसान में दूसरों से मिलने वाली बेपनाह मोहब्बत
Read Moreजीवन में योग को अपनाइए, रोगों को दूर भगाइए,चेहरे की स्वर्णिम कांति संग जीवन “आनंद” बढ़ाइए ।चंचल मन को समझाइए,
Read Moreशब्द कभी केवल शब्द नहीं होते,वे समय के दस्तावेज होते हैं,जो लिखे जाते हैंसदियों की चुप्पियों के बीच,और पढ़े जाते
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